IPO – लिस्टिंग के बाद लगातार पांचवें दिन अपर सर्किट पर आए मेरिट्रोनिक्स शेयर
IPO – शेयर बाजार में हाल ही में सूचीबद्ध हुई मेरिट्रोनिक्स लिमिटेड ने निवेशकों का ध्यान तेजी से अपनी ओर खींचा है। कंपनी के शेयरों में लगातार खरीदारी का माहौल बना हुआ है और शुक्रवार को भी स्टॉक 5 प्रतिशत के अपर सर्किट के साथ 361.25 रुपये तक पहुंच गया। खास बात यह है कि बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद से कंपनी के शेयर लगातार पांच कारोबारी सत्रों तक ऊपरी सर्किट सीमा पर बने हुए हैं।

आईपीओ में 149 रुपये प्रति शेयर के भाव पर उपलब्ध कराए गए इस स्टॉक ने बेहद कम समय में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। लिस्टिंग के बाद से अब तक शेयर मूल्य में लगभग 142 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है।
बाजार में शानदार शुरुआत
मेरिट्रोनिक्स के शेयरों ने 8 जून को शेयर बाजार में प्रवेश किया था। लिस्टिंग के दिन ही स्टॉक ने मजबूत शुरुआत करते हुए 283.10 रुपये पर कारोबार शुरू किया, जो आईपीओ मूल्य की तुलना में करीब 90 प्रतिशत अधिक था। पहले दिन ही शेयर अपर सर्किट को छूकर 297.25 रुपये पर पहुंच गया था।
इसके बाद से स्टॉक में लगातार खरीदारी बनी रही और हर दिन 5 प्रतिशत की अधिकतम बढ़त के साथ कारोबार बंद होता रहा। निवेशकों की इस रुचि ने कंपनी का बाजार पूंजीकरण बढ़ाकर 631 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचा दिया है।
निवेशकों ने जमकर दिखाई दिलचस्पी
कंपनी के सार्वजनिक निर्गम को निवेशकों से असाधारण प्रतिक्रिया मिली थी। 1 जून से 3 जून के बीच खुले इस आईपीओ को कुल 315.36 गुना सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ। यह आंकड़ा दर्शाता है कि निवेशकों के बीच कंपनी को लेकर काफी उत्साह था।
रिटेल निवेशकों की श्रेणी में यह निर्गम 297.67 गुना भरा गया। वहीं गैर-संस्थागत निवेशकों ने भी बड़ी संख्या में आवेदन किए और उनका कोटा 476.59 गुना सब्सक्राइब हुआ। Qualified Institutional Buyers की श्रेणी में भी मजबूत भागीदारी देखने को मिली, जहां 224.91 गुना आवेदन प्राप्त हुए।
निवेश की न्यूनतम सीमा क्या थी
आईपीओ में खुदरा निवेशकों को अधिकतम दो लॉट के लिए आवेदन करने की अनुमति थी। दो लॉट में कुल 2,000 शेयर शामिल थे। इस आधार पर एक निवेशक को आवेदन के लिए लगभग 2.98 लाख रुपये लगाने पड़े। उच्च निवेश सीमा के बावजूद निवेशकों की भागीदारी उल्लेखनीय रही।
किस क्षेत्र में काम करती है कंपनी
मेरिट्रोनिक्स लिमिटेड इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में सक्रिय है। कंपनी की स्थापना वर्ष 1988 में हुई थी और यह रक्षा, एयरोस्पेस, दूरसंचार तथा औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े उत्पादों के निर्माण में विशेषज्ञता रखती है।
कंपनी उच्च विश्वसनीयता वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मिशन-क्रिटिकल कंपोनेंट तैयार करती है। इसके अलावा यह कंपोनेंट सोर्सिंग, पीसीबी असेंबली, सिस्टम इंटीग्रेशन, परीक्षण और तैयार उत्पादों की आपूर्ति जैसी सेवाएं भी प्रदान करती है। इसका कारोबार मुख्य रूप से बिजनेस-टू-बिजनेस मॉडल पर आधारित है।
जुटाई गई पूंजी का होगा यह उपयोग
करीब 70 करोड़ रुपये के इस सार्वजनिक निर्गम से जुटाई गई राशि का उपयोग कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए करेगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फंड का एक हिस्सा नई मशीनरी और उपकरणों की खरीद में लगाया जाएगा। इसके अलावा कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने, कुछ ऋणों का भुगतान करने और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए भी राशि का उपयोग किया जाएगा।
प्रमोटर हिस्सेदारी में बदलाव
आईपीओ से पहले कंपनी में प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी 85.17 प्रतिशत थी। सार्वजनिक निर्गम के बाद यह घटकर 62.28 प्रतिशत रह गई है। कंपनी का नेतृत्व डोवरी येसुदास, डोवरी अमरनाथ, वनजा डी, डोर्सी केतन चंद्रा और डोवरी थमन कर रहे हैं।