MSCI – डीमर्जर के बाद वेदांता को वैश्विक इंडेक्स से किया गया बाहर
MSCI – वेदांता समूह के पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण झटका लगा है। वैश्विक इंडेक्स प्रदाता MSCI ने घोषणा की है कि वेदांता लिमिटेड को अपने ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स और लार्ज कैप इंडेक्स से हटाया जाएगा। यह बदलाव 22 जून से प्रभावी होगा। बाजार विशेषज्ञ इस फैसले को कंपनी के हालिया डीमर्जर के बाद बदले आकार और मूल्यांकन से जोड़कर देख रहे हैं।

डीमर्जर के बाद बदली कंपनी की स्थिति
हाल ही में वेदांता समूह ने अपने कारोबार को कई अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियों में विभाजित किया है। इस पुनर्गठन के तहत वेदांता एल्युमीनियम, वेदांता पावर, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता आयरन एंड स्टील को अलग इकाइयों के रूप में शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया गया। विभाजन के बाद मूल वेदांता लिमिटेड का आकार और बाजार पूंजीकरण पहले की तुलना में कम हो गया है, जिसके चलते वह MSCI के निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतर सकी।
विदेशी निवेश प्रवाह पर पड़ सकता है असर
बाजार जानकारों का कहना है कि किसी कंपनी का प्रमुख वैश्विक इंडेक्स से बाहर होना निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। कई विदेशी फंड और संस्थागत निवेशक MSCI जैसे इंडेक्स को आधार बनाकर निवेश करते हैं। ऐसे में इंडेक्स से बाहर होने पर संबंधित शेयर में विदेशी निवेश की हिस्सेदारी पर असर पड़ सकता है और बिकवाली का दबाव बढ़ने की संभावना रहती है।
नई कंपनियों की बाजार में शुरुआत
डीमर्जर के बाद समूह की चार नई कंपनियों ने भारतीय शेयर बाजार में कारोबार शुरू किया। सूचीबद्धता के पहले दिन निवेशकों की नजर इन कंपनियों के प्रदर्शन पर रही। हालांकि कारोबार के दौरान अधिकांश शेयरों में दबाव देखने को मिला और दिन के अंत तक कई कंपनियों के शेयर शुरुआती स्तर से नीचे बंद हुए।
वेदांता एल्युमीनियम की शुरुआत मजबूत स्तर पर हुई, लेकिन बाद में इसमें गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता आयरन एंड स्टील के शेयरों में भी कमजोरी देखी गई। वेदांता पावर ने शुरुआती कारोबार में बढ़त दिखाई, लेकिन अंत में मामूली नुकसान के साथ बंद हुआ।
एनएसई और बीएसई दोनों पर हुई लिस्टिंग
समूह की नई कंपनियों के शेयर बीएसई के साथ-साथ एनएसई पर भी सूचीबद्ध हुए। निवेशकों को इन कंपनियों में अलग-अलग कारोबार क्षेत्रों के आधार पर निवेश का अवसर मिला है। समूह के पुनर्गठन का उद्देश्य प्रत्येक व्यवसाय को स्वतंत्र पहचान देना और निवेशकों को अधिक स्पष्ट मूल्यांकन उपलब्ध कराना बताया गया है।
बाजार पूंजीकरण में दिखा कारोबार का आकार
सूचीबद्धता के बाद कंपनियों के बाजार मूल्यांकन ने उनके कारोबार के आकार की तस्वीर भी पेश की। एल्युमीनियम कारोबार वाली इकाई सबसे बड़े मूल्यांकन के साथ उभरी, जबकि पावर, ऑयल एंड गैस और आयरन एंड स्टील इकाइयों का मूल्यांकन अपेक्षाकृत कम रहा। इन आंकड़ों से निवेशकों को विभिन्न व्यवसायों की स्वतंत्र बाजार स्थिति का आकलन करने का अवसर मिला।
ट्रेडिंग नियमों पर भी लागू हैं विशेष शर्तें
डीमर्जर के बाद सूचीबद्ध हुई कंपनियों को फिलहाल ट्रेड-फॉर-ट्रेड श्रेणी में रखा गया है। इस व्यवस्था के तहत इंट्राडे ट्रेडिंग की अनुमति नहीं होती और हर खरीद-बिक्री सौदे में शेयरों की वास्तविक डिलीवरी अनिवार्य होती है। इसका अर्थ है कि निवेशक किसी शेयर को खरीदने के बाद उसी दिन बेच नहीं सकते और उन्हें निर्धारित सेटलमेंट अवधि का इंतजार करना पड़ता है।
निवेशकों की नजर अगले कदम पर
वेदांता समूह के पुनर्गठन के बाद अब बाजार की नजर नई कंपनियों के प्रदर्शन और उनकी स्वतंत्र कारोबारी रणनीतियों पर रहेगी। वहीं MSCI के फैसले का असर आने वाले दिनों में शेयरों की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों में देखने को मिल सकता है।