Vodafone Idea AGR Relief: 83,000 करोड़ की राहत या Vi की नई ज़िंदगी, सरकार के एक फैसले ने शेयर बाजार में मचा दी हलचल
Vodafone Idea AGR Relief: केंद्र सरकार की ओर से वोडाफोन आइडिया (Vi) को एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू से जुड़ी 83,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बकाया राशि पर चार से पांच साल की ब्याज-मुक्त मोहलत देने की तैयारी ने बाजार में हलचल मचा दी है। इस खबर के सामने आते ही Vi के शेयर शुरुआती कारोबार में 3 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 12 रुपये के स्तर पर पहुंच गए। लंबे समय से नकदी संकट से जूझ रही कंपनी के लिए यह खबर किसी जीवनरेखा से कम नहीं मानी जा रही है (Vodafone Idea Share).

नकदी संकट से जूझती कंपनी को तत्काल राहत
इस प्रस्तावित राहत का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कंपनी पर तत्काल नकदी का दबाव (Cash Flow Relief) कम हो जाएगा। मौजूदा योजना के अनुसार, मोहलत अवधि खत्म होने के बाद Vi को बकाया राशि का भुगतान छह किस्तों में करना होगा। हालांकि दायित्वों के पुनर्मूल्यांकन के बाद यह राशि लगभग आधी रह सकती है। इससे कंपनी को नेटवर्क विस्तार, 5G तैयारी और परिचालन स्थिरता पर फोकस करने का समय मिलेगा .
कैबिनेट की मंजूरी पर टिकी निगाहें
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे मामले के लिए एक सचिव-स्तरीय समिति गठित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता कोई सेवारत या सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी करेगा। यह समिति दूरसंचार विभाग और वोडाफोन आइडिया दोनों के पक्ष सुनेगी और यह तय करेगी कि अंततः कितनी राशि भुगतान योग्य होगी। कैबिनेट की मंजूरी (Cabinet Approval) मिलने के बाद आने वाले हफ्तों में इस पैकेज का औपचारिक ऐलान संभव है .
भारी ब्याज ने कैसे बढ़ाया संकट
वर्तमान भुगतान कार्यक्रम के तहत, मार्च 2026 में Vi को 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की पहली किस्त चुकानी है। यह वह मोहलत है जो सरकार ने 2021 में दी थी, लेकिन वह ब्याज-मुक्त नहीं थी। नतीजतन हर साल बकाया राशि बढ़ती चली गई। विशेषज्ञों (AGR Interest) के अनुसार, Vi और भारती एयरटेल दोनों ही इस बकाया पर सालाना 29-30 प्रतिशत तक चक्रवृद्धि ब्याज चुका रही हैं, जिसने संकट को और गहरा किया.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी देनदारी
2019 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Verdict) ने दूरसंचार विभाग के उस रुख को सही ठहराया था, जिसमें कहा गया था कि टेलीकॉम कंपनियों को AGR की गणना में गैर-टेलीकॉम आय भी शामिल करनी होगी। इसी फैसले के चलते स्पेक्ट्रम और लाइसेंस शुल्क जैसी स्टैच्यूटरी देनदारियां कई गुना बढ़ गईं। Vi पर जो भारी बकाया आज दिख रहा है, उसकी जड़ें उसी ऐतिहासिक फैसले में छिपी हैं .
नए पैकेज में ब्याज पर पूरी तरह ब्रेक
प्रस्तावित राहत पैकेज (Telecom Relief Package) के तहत Vi की बकाया राशि को “सील” कर दिया जाएगा, यानी भविष्य में उस पर कोई नया ब्याज नहीं जुड़ेगा। यह राहत केवल वोडाफोन आइडिया के लिए होगी, जबकि भारती एयरटेल को तय समयसारणी के अनुसार ही भुगतान जारी रखना होगा। सरकार का यह कदम यह दिखाता है कि वह तीसरे बड़े ऑपरेटर को सिस्टम से बाहर नहीं होने देना चाहती .
सरकार बनी सबसे बड़ी शेयरधारक
वोडाफोन आइडिया की मौजूदा स्थिति में केंद्र सरकार की भूमिका बेहद अहम हो गई है। कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी(Government Stake) 48.99 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जिससे वह सबसे बड़ी शेयरधारक बन गई है। पहले भी सरकार ने Vi की कुछ बकाया राशि को इक्विटी में बदला है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र को इस संकटग्रस्त कंपनी के लिए विशेष पैकेज तैयार करने की अनुमति दी थी .
नई पूंजी जुटाने का रास्ता खुलेगा
AGR विवाद सुलझने के बाद Vi के लिए 25,000 करोड़ रुपये की नियोजित पूंजी जुटाने का रास्ता साफ हो जाएगा। एक सफल शेयर इश्यू से सरकार की हिस्सेदारी घट सकती है और भविष्य में अतिरिक्त बकाया को इक्विटी (Fund Raising). में बदलने का विकल्प भी खुला रहेगा। इससे कंपनी को लंबे समय तक परिचालन जारी रखने और प्रतिस्पर्धा में टिके रहने का मौका मिलेगा
विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी
पहले की रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यूयॉर्क की प्राइवेट इक्विटी फर्म टिलमैन ग्लोबल होल्डिंग्स Vi में 4 से 6 अरब डॉलर तक निवेश और परिचालन नियंत्रण लेने पर बातचीत कर रही थी। यह प्रस्ताव सीधे तौर पर सरकारी राहत से जुड़ा हुआ था। अब जब राहत की उम्मीद मजबूत हुई है, तो अन्य वैश्विक निवेशकों (Foreign Investment) की दिलचस्पी भी बढ़ सकती है



