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Marriage Norms – शादी और समाज पर नीना गुप्ता का सीधा सवाल

Marriage Norms – अभिनेत्री नीना गुप्ता एक बार फिर समाज से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान उन्होंने शादी और महिलाओं से जुड़ी पारंपरिक सोच पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि भले ही हम आधुनिकता की बातें करते हों, लेकिन भारतीय समाज में कई पुरानी धारणाएं अब भी गहराई से मौजूद हैं। उन्होंने उदाहरणों के जरिए समझाने की कोशिश की कि महिलाओं के लिए बनाए गए कई अनकहे नियम आज भी बदले नहीं हैं।

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शादी के समय महिलाओं से अपेक्षाएं

बातचीत के दौरान नीना गुप्ता से पूछा गया कि पुरुष शादी करते समय किन बातों को प्राथमिकता देते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि अक्सर यह माना जाता है कि लड़की नए परिवार में आसानी से ढल जाएगी, सास-ससुर के साथ तालमेल बैठाएगी और घर की परंपराओं को अपनाएगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कई जगहों पर अब भी महिला के चरित्र को लेकर पुराने पैमाने लागू किए जाते हैं।

जब उनसे सवाल किया गया कि क्या आज भी ऐसी सोच मौजूद है, तो उनका जवाब साफ था—परिवर्तन की बात जरूर होती है, लेकिन जमीन पर हालात बहुत अलग नहीं दिखते। उनके मुताबिक, अगर हम भारत की बात कर रहे हैं तो यहां सामाजिक मानसिकता में बदलाव की रफ्तार अभी भी धीमी है।

‘खुलापन’ कितना वास्तविक है?

नीना गुप्ता ने इस धारणा पर भी सवाल उठाया कि आज का समाज पूरी तरह खुला और प्रगतिशील हो चुका है। उन्होंने कहा कि कुछ शहरी इलाकों या खास वर्गों में बदलाव जरूर दिखाई देता है, लेकिन इसे पूरे देश की तस्वीर नहीं माना जा सकता।

उनका कहना था कि आज भी कई परिवारों में बहू से सुबह सिर ढककर बड़ों के पैर छूने जैसी परंपराएं निभाने की अपेक्षा की जाती हैं। आधुनिक कपड़े पहनने या खुले विचार व्यक्त करने वाली महिलाओं की तस्वीर को पूरे समाज का प्रतिनिधित्व मान लेना वास्तविकता से दूर है।

धार्मिक आस्थाओं को लेकर टकराव

अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए नीना गुप्ता ने कुछ व्यक्तिगत उदाहरण भी साझा किए। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के एक रिश्तेदार की शादी मुंबई के एक परिवार में हुई थी। शादी के बाद उस महिला को अपनी पसंद के अनुसार पूजा-पाठ करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि वह महिला साईं बाबा की पूजा करती थीं और अपने कमरे में उनकी तस्वीर रखती थीं। लेकिन ससुराल पक्ष चाहता था कि वह परिवार के गुरु की तस्वीर ही कमरे में लगाए। इस मतभेद के चलते परिवार में तनाव की स्थिति बन गई। नीना गुप्ता के मुताबिक, यह सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि उस मानसिकता का उदाहरण है जहां विवाह के बाद महिला की व्यक्तिगत आस्था भी परिवार की अपेक्षाओं के अधीन कर दी जाती है।

निजी जीवन में दखल के उदाहरण

उन्होंने एक और उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी भांजी को भी शादी के बाद कुछ ऐसी ही बातों का सामना करना पड़ा। परिवार की ओर से यह कहा गया कि बेड के पास वाली मेज पर अपने मायके की तस्वीर न रखी जाए। नीना गुप्ता के अनुसार, ऐसी छोटी-छोटी लगने वाली बातें भी इस बात की ओर इशारा करती हैं कि महिलाओं के निजी स्पेस को कितनी सहजता से सीमित किया जाता है।

उनका मानना है कि समाज में वास्तविक बदलाव तभी संभव है जब इन रोजमर्रा की पाबंदियों पर खुलकर चर्चा हो और उन्हें सामान्य मानने की प्रवृत्ति खत्म हो।

बदलाव की दिशा में लंबा सफर

नीना गुप्ता ने बातचीत के अंत में कहा कि भारत में सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन अभी काफी रास्ता तय करना बाकी है। उनके मुताबिक, आधुनिकता केवल पहनावे या बाहरी व्यवहार तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सोच में भी समानता और स्वतंत्रता दिखाई देनी चाहिए।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समाज को यह समझने की जरूरत है कि विवाह दो व्यक्तियों का संबंध है, जिसमें दोनों की भावनाओं, मान्यताओं और व्यक्तिगत पसंद का सम्मान होना चाहिए।

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