Netflix Review – डार्क कॉमेडी और सस्पेंस के संग आई नई फिल्म
Netflix Review – नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म ‘मां-बहन’ का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। अब फिल्म दर्शकों के बीच पहुंच चुकी है और इसकी कहानी सस्पेंस, अपराध और हल्के-फुल्के हास्य के मिश्रण के साथ आगे बढ़ती है। करीब 2 घंटे 7 मिनट की यह फिल्म शुरुआत में एक मर्डर मिस्ट्री की तरह दिखाई देती है, लेकिन धीरे-धीरे कहानी कई अप्रत्याशित मोड़ों से गुजरती है।

तीन महिलाओं के इर्द-गिर्द बुनी गई कहानी
फिल्म की कहानी एक सिंगल मां रेखा और उनकी दो बेटियों जया और सुषमा के जीवन के आसपास घूमती है। रेखा का किरदार माधुरी दीक्षित ने निभाया है, जबकि तृप्ति डिमरी जया और धरना दुर्गा सुषमा के रूप में नजर आती हैं। तीनों अपने-अपने संघर्षों और निजी परेशानियों में उलझी हुई हैं, जिससे कहानी को अलग-अलग भावनात्मक परतें मिलती हैं।
रिश्तों और सामाजिक दबावों की झलक
जया अपने वैवाहिक जीवन में समस्याओं का सामना कर रही है, जबकि सुषमा सोशल मीडिया पर पहचान बनाने की कोशिश में लगी हुई है। दूसरी ओर रेखा को समाज की तिरछी नजरों और तरह-तरह की चर्चाओं का सामना करना पड़ता है। फिल्म यह दिखाने का प्रयास करती है कि अकेली महिला के बारे में समाज किस तरह धारणाएं बना लेता है और अफवाहों को सच मान लेता है।
पड़ोसी की मौत से बदलती है कहानी
कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब परिवार के पड़ोसी गुप्ता जी का शव उनके घर के किचन में मिलता है। इस घटना के बाद रेखा अपनी दोनों बेटियों को बुलाती हैं और यहीं से रहस्य की परतें खुलनी शुरू होती हैं। जैसे-जैसे घटनाक्रम आगे बढ़ता है, दर्शकों को कई ऐसे मोड़ देखने को मिलते हैं जो कहानी को लगातार रोचक बनाए रखते हैं।
रवि किशन के किरदार ने खींचा ध्यान
फिल्म में रवि किशन एक नकारात्मक भूमिका में दिखाई दिए हैं। शुरुआती हिस्से में उनकी मौजूदगी सीमित रहती है, लेकिन बाद के दृश्यों में उनका प्रभाव साफ नजर आता है। कम स्क्रीन टाइम के बावजूद उनकी संवाद अदायगी और स्क्रीन प्रेजेंस कहानी पर मजबूत असर छोड़ती है।
सहायक कलाकारों का भी अच्छा योगदान
फिल्म में गीतांजलि कुलकर्णी भी अहम भूमिका में हैं। उन्होंने एक चिड़चिड़े स्वभाव वाली महिला का किरदार निभाया है, जो कई दृश्यों में हल्का हास्य पैदा करती है। उनके अलावा अरुणोदय सिंह भी महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आते हैं। फिल्म में परेश रावल का कैमियो भी शामिल किया गया है, जो दर्शकों के लिए एक दिलचस्प सरप्राइज साबित हो सकता है।
अभिनय और निर्देशन का संतुलित प्रयास
माधुरी दीक्षित ने अपने अनुभव का प्रभावी प्रदर्शन किया है और फिल्म में भावनात्मक तथा हास्य दोनों पक्षों को संतुलित तरीके से निभाया है। तृप्ति डिमरी ने भी अपने किरदार के साथ न्याय किया है। धरना दुर्गा का अभिनय भी स्वाभाविक महसूस होता है। निर्देशक सुरेश त्रिवेणी ने कहानी को रहस्य और हास्य के बीच संतुलित रखने की कोशिश की है।
देखनी चाहिए या नहीं?
अगर आपको डार्क कॉमेडी, क्राइम और सस्पेंस से भरपूर कहानियां पसंद हैं तो ‘मां-बहन’ आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है। फिल्म केवल रहस्य तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सामाजिक सोच और पारिवारिक रिश्तों पर भी टिप्पणी करती है। सप्ताहांत में हल्के-फुल्के मनोरंजन के साथ सस्पेंस का अनुभव लेने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म देखी जा सकती है। फिल्म को आईएमडीबी पर 5.7 की रेटिंग मिली है।