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TradePolicy – मानवाधिकार मुद्दों पर पाकिस्तान को मिली यूरोपीय संसद की सख्त चेतावनी

TradePolicy – यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि हालात में ठोस सुधार नहीं हुआ तो यूरोपीय संघ की ओर से मिलने वाली व्यापारिक रियायतों की समीक्षा की जा सकती है। हाल ही में पारित एक प्रस्ताव में सांसदों ने कहा कि मानवाधिकार, कानून के शासन और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित प्रगति नहीं होने की स्थिति में पाकिस्तान को मिलने वाली GSP+ व्यापार सुविधा प्रभावित हो सकती है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब यूरोपीय संघ पाकिस्तान के सबसे बड़े निर्यात बाजारों में शामिल है।

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GSP+ सुविधा क्यों है अहम

GSP+ यूरोपीय संघ की विशेष व्यापारिक व्यवस्था है, जिसके तहत पात्र विकासशील देशों को यूरोपीय बाजार में कई उत्पादों के निर्यात पर शुल्क में बड़ी राहत मिलती है। इस सुविधा का लाभ लेने वाले देशों को मानवाधिकार, श्रमिक अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और सुशासन से जुड़ी 27 अंतरराष्ट्रीय संधियों का प्रभावी पालन करना होता है। पाकिस्तान को वर्ष 2014 में यह दर्जा मिला था, जिसके बाद यूरोपीय देशों में उसके निर्यात, विशेष रूप से वस्त्र उद्योग से जुड़े उत्पादों, में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऐसे में यदि इस व्यवस्था में कोई बदलाव होता है तो उसका सीधा असर पाकिस्तान के निर्यात कारोबार पर पड़ सकता है।

किन मुद्दों पर जताई गई चिंता

यूरोपीय संसद के प्रस्ताव में पाकिस्तान के कई संवेदनशील मामलों का उल्लेख किया गया है। सांसदों ने विशेष रूप से बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी की घटनाओं, राजनीतिक विरोधियों और पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई, अल्पसंख्यकों की स्थिति तथा ईशनिंदा, आतंकवाद विरोधी और साइबर अपराध से जुड़े कानूनों के कथित दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की है। प्रस्ताव में पाकिस्तान से इन मामलों में पारदर्शी जांच और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कदम उठाने का आग्रह भी किया गया है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का भी हुआ उल्लेख

प्रस्ताव में कुछ प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक हस्तियों के मामलों का भी जिक्र किया गया है। यूरोपीय सांसदों ने बलूच अधिकार कार्यकर्ता माहरंग बलोच और मानवाधिकार वकील ईमान मजारी के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर चिंता व्यक्त करते हुए निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा अली वजीर, हनीफ पश्तीन और दाद शाह से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया और न्यायिक प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाए रखने पर जोर दिया गया।

आगे क्या हो सकता है

यूरोपीय संसद का यह प्रस्ताव अपने आप में GSP+ सुविधा को तत्काल समाप्त नहीं करता, लेकिन इसे भविष्य की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। यूरोपीय आयोग आगामी EU-Pakistan GSP+ Monitoring Dialogue के दौरान इन सभी मुद्दों पर पाकिस्तान की प्रगति का आकलन करेगा। यदि मानवाधिकार और सुशासन से जुड़े मामलों में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देते हैं, तो व्यापारिक रियायतों पर पुनर्विचार किया जा सकता है। ऐसे किसी भी फैसले का प्रभाव पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, विशेषकर उसके निर्यात आधारित उद्योगों पर पड़ने की संभावना है।

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