अंतर्राष्ट्रीय

HumanRights – अल्पसंख्यक लड़कियों की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान पर सख्त हुए यूरोपीय संसद

HumanRights – यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की नाबालिग लड़कियों से जुड़े कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। गुरुवार को पारित एक प्रस्ताव में सांसदों ने पाकिस्तान सरकार से ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कार्रवाई करने का आग्रह किया। प्रस्ताव में विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय की बच्चियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया गया है।

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मारिया शाहबाज के मामले का किया उल्लेख

यूरोपीय संसद ने अपने प्रस्ताव में 13 वर्षीय ईसाई लड़की मारिया शाहबाज के मामले को प्रमुखता से शामिल किया है। प्रस्ताव के अनुसार, मारिया के कथित अपहरण के बाद उसका धर्म परिवर्तन कराया गया और बाद में उसकी शादी भी कराई गई। सांसदों ने मांग की है कि उसे स्वतंत्र कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए, परिवार से मिलने का अवसर दिया जाए और आवश्यक मनोवैज्ञानिक सहयोग भी सुनिश्चित किया जाए। प्रस्ताव में कहा गया है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पीड़िता के अधिकारों की पूरी तरह रक्षा की जानी चाहिए।

मानवाधिकारों पर जताई व्यापक चिंता

यूरोपीय संसद का कहना है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े मानवाधिकार संबंधी व्यापक मुद्दों की ओर भी संकेत करता है। प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र के वर्ष 2025 से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि कथित जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह के मामलों में बड़ी संख्या हिंदू और ईसाई समुदाय की लड़कियों की बताई जाती है। सांसदों ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रभावी संस्थागत सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।

पाकिस्तान सरकार के सामने रखी गई प्रमुख मांगें

प्रस्ताव में पाकिस्तान प्रशासन से कई महत्वपूर्ण कदम उठाने का आग्रह किया गया है। इनमें कथित अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों की शिकायतों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी तंत्र विकसित करना, बाल विवाह रोकने से संबंधित कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना और प्रत्येक मामले की पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच कराना शामिल है। साथ ही दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने और पीड़ित लड़कियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।

मानवाधिकार संगठन ने भी जताई चिंता

मानवाधिकार संगठन Human Rights Focus Pakistan (HRFP) ने भी मारिया शाहबाज के मामले को लेकर चिंता व्यक्त की है। संगठन के अनुसार, लड़की के परिवार ने उसके नाबालिग होने का दावा किया था, जबकि बाद में अदालत में उसके कथित स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन और विवाह से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल परिवार कानूनी माध्यमों से राहत पाने का प्रयास कर रहा है। यूरोपीय संसद ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और कानून के निष्पक्ष अनुपालन से ही पीड़ितों के अधिकारों की प्रभावी रक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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