Ammonia Water Contamination: यमुना के पानी में बढ़ा अमोनिया, स्वास्थ्य पर मंडराया खतरा
Ammonia Water Contamination: मध्य प्रदेश के इंदौर के बाद अब देश की राजधानी दिल्ली में दूषित जल की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। दिल्ली जल बोर्ड ने हाल ही में वजीराबाद वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन को अस्थायी रूप से रोक दिया है क्योंकि यमुना नदी के पानी में अमोनिया का स्तर खतरनाक सीमा से ऊपर चला गया है। इस (Ammonia Water Contamination) के कारण दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में पीने के पानी की आपूर्ति ठप हो गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह संकट 4 फरवरी तक जारी रह सकता है, जिससे लाखों लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ेगा। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में चार ट्रीटमेंट प्लांट अपनी क्षमता से केवल 75 प्रतिशत पर ही काम कर रहे हैं, जिससे स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

अमोनिया का बढ़ता स्तर और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र
अमोनिया एक ऐसा पदार्थ है जिसे लंबे समय से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता रहा है। जब पानी में इसकी मात्रा बढ़ती है, तो यह न केवल पानी की गुणवत्ता को खराब करता है, बल्कि (Water Quality Degradation) के कारण जलीय जीवों और वनस्पतियों के अस्तित्व पर भी संकट पैदा कर देता है। अमोनिया आमतौर पर रंगहीन होता है लेकिन इसकी गंध बहुत तीखी होती है। औद्योगिक कचरे का नदियों में गिरना और मरे हुए जानवरों या पौधों के अवशेषों का पानी में सड़ना, इसका मुख्य कारण माना जाता है। दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहरों में यह समस्या तब और विकराल हो जाती है जब नदी के पानी का सीधा उपयोग शोधन के बाद पीने के लिए किया जाता है।
मानव शरीर और तंत्रिका तंत्र पर अमोनिया का प्रभाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो अमोनिया युक्त पानी पीना किसी जहर के घूंट जैसा हो सकता है। शरीर में प्रवेश करने के बाद यह सीधे खून के प्रवाह में मिल जाता है और हमारे (Neurological Health Impact) को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। सबसे गंभीर खतरा यह है कि यह मस्तिष्क की सोचने-समझने की क्षमता को क्षीण कर देता है और नर्वस सिस्टम को धीमा कर सकता है। हवा या पानी के जरिए अमोनिया के किसी भी रूप में संपर्क में आना इंसान को मानसिक भ्रम (Confusion) की स्थिति में डाल सकता है। लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन करने से याददाश्त और एकाग्रता में कमी जैसे स्थायी लक्षण भी विकसित हो सकते हैं।
श्वसन प्रणाली और आंतरिक अंगों के लिए गंभीर खतरा
पीने के पानी में अमोनिया की मात्रा यदि 0.5 ppm से अधिक हो जाए, तो यह फेफड़ों और श्वसन तंत्र के लिए काल बन सकती है। अमोनिया युक्त जल का सेवन करने से (Respiratory System Irritation) जैसी समस्याएं पैदा होती हैं, जिसमें सीने में दर्द और सांस लेने में कठिनाई प्रमुख हैं। जो लोग पहले से ही अस्थमा या ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह दूषित पानी जानलेवा साबित हो सकता है। इसके अलावा, पेट में जलन, लगातार मतली और उल्टी की शिकायत भी आम है। चिकित्सा शोधों से पता चला है कि अगर शरीर में अमोनिया की उच्च सांद्रता लंबे समय तक बनी रहे, तो यह लिवर और किडनी की कार्यक्षमता को भी पूरी तरह बाधित कर सकती है।
जल जनित बीमारियों से बचाव और सावधानियां
जब तक दिल्ली में पानी की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं हो जाती, तब तक नागरिकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। घर में आने वाले पानी को सीधे उपयोग करने के बजाय उसे (Household Water Purification) की प्रक्रिया से गुजारना अनिवार्य है। सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि पानी को कम से कम 15-20 मिनट तक अच्छी तरह उबाला जाए और फिर छानकर उपयोग में लाया जाए। जिन घरों में आरओ (RO) सिस्टम लगा है, वे इसके फिल्टर की जांच जरूर कर लें। विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को इस दौरान बाहर का खुला पानी या असुरक्षित स्रोतों से मिलने वाले जल के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए ताकि किसी भी आपातकालीन स्वास्थ्य स्थिति से बचा जा सके।



