स्वास्थ्य

Health – आयुर्वेद के इस आसान नियम को अपनाकर बेहतर रखी जा सकती है सेहत

Health – आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलती खानपान की आदतों ने लोगों में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ा दिया है। डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, फैटी लिवर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं अब बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पौष्टिक भोजन करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भोजन का समय और उसकी मात्रा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। इसी संदर्भ में चिकित्सक डॉ. सलीम जैदी ने खानपान से जुड़ा एक सरल नियम साझा किया है, जिसे अपनाने से स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

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कम मात्रा में भोजन करने पर जोर

डॉ. सलीम जैदी के अनुसार स्वस्थ जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण आदतों में से एक है आवश्यकता से कम भोजन करना। उनका कहना है कि पेट को पूरी तरह भरने के बजाय लगभग 75 प्रतिशत तक ही भोजन करना बेहतर माना जाता है। आयुर्वेद में इसे “मिताहार” की संज्ञा दी गई है। इस सिद्धांत के अनुसार सीमित मात्रा में भोजन करने से पाचन तंत्र पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता और शरीर भोजन को बेहतर ढंग से ऊर्जा में परिवर्तित कर पाता है।

आयुर्वेद और आधुनिक शोध की समान राय

विशेषज्ञ बताते हैं कि आयुर्वेद में पाचन शक्ति को शरीर के अच्छे स्वास्थ्य की आधारशिला माना गया है। जरूरत से अधिक भोजन करने पर पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है। वहीं आधुनिक स्वास्थ्य अनुसंधान भी संकेत देते हैं कि नियंत्रित मात्रा में भोजन करने से मेटाबॉलिज्म बेहतर बना रहता है और लंबे समय में वजन नियंत्रण सहित कई अन्य लाभ मिल सकते हैं। इसलिए भोजन की गुणवत्ता के साथ उसकी मात्रा पर भी ध्यान देना जरूरी माना जाता है।

सूर्यास्त के बाद भोजन सीमित रखने की सलाह

डॉ. जैदी का कहना है कि यदि संभव हो तो सूर्यास्त के बाद भोजन करने से बचना चाहिए या रात का भोजन हल्का और समय पर लेना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार दिन ढलने के साथ शरीर की पाचन क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। ऐसे में देर रात भारी भोजन करने से पाचन प्रभावित हो सकता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी देर रात खाने को नींद की गुणवत्ता, मेटाबॉलिज्म और वजन प्रबंधन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला मानता है।

भोजन से जुड़ी छोटी आदतें भी बन सकती हैं फायदेमंद

स्वास्थ्य विशेषज्ञ नियमित दिनचर्या अपनाने पर भी विशेष जोर देते हैं। उनका सुझाव है कि भोजन का समय निश्चित रखें, आराम से बैठकर खाना खाएं और प्रत्येक निवाले को अच्छी तरह चबाने की आदत विकसित करें। भोजन के दौरान मोबाइल फोन, टीवी या अन्य डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाए रखना भी लाभदायक माना जाता है, क्योंकि इससे व्यक्ति भोजन पर पूरा ध्यान दे पाता है। साथ ही शरीर के भूख और तृप्ति के संकेतों को समझकर उसी अनुसार भोजन करना बेहतर स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।

संतुलित दिनचर्या से मिल सकता है दीर्घकालिक लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी सेहत केवल दवाओं से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सही आदतों से भी बनती है। संतुलित भोजन, उचित समय पर खाना, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि मिलकर जीवनशैली संबंधी कई समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि किसी भी स्वास्थ्य सलाह को अपनाने से पहले अपनी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार डॉक्टर से परामर्श लेना उचित रहता है।

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