स्वास्थ्य

PregnancyCare – गर्भावस्था में खुजली को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी

PregnancyCare – गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं। इन बदलावों का असर त्वचा पर भी दिखाई देता है, जिसके कारण कई महिलाओं को खुजली, जलन या त्वचा में खिंचाव महसूस हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार हल्की खुजली सामान्य मानी जाती है, लेकिन लगातार या तेज खुजली कुछ मामलों में स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या का संकेत भी हो सकती है।

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डॉक्टरों का कहना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में बढ़ते बदलावों की वजह से त्वचा अधिक संवेदनशील हो जाती है। खासतौर पर पेट, कमर और जांघों के आसपास खुजली की समस्या ज्यादा देखी जाती है। ऐसे लक्षणों को समझना और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है।

त्वचा में खिंचाव और सूखापन बनता है वजह

गर्भ में बच्चे के बढ़ने के साथ पेट की त्वचा फैलने लगती है। इस कारण त्वचा में रूखापन और खिंचाव महसूस हो सकता है। कई महिलाओं को इसी वजह से पेट और आसपास के हिस्सों में खुजली की शिकायत होती है। यह स्थिति सामान्य मानी जाती है और सही देखभाल से इसमें राहत मिल सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रेग्नेंसी में त्वचा की संवेदनशीलता बढ़ने से हल्की एलर्जी या लालपन भी दिखाई दे सकता है। कुछ मामलों में तेज खुशबू वाले साबुन, डिटर्जेंट, परफ्यूम या सिंथेटिक कपड़ों के कारण भी खुजली बढ़ सकती है। इसलिए गर्भावस्था में हल्के और त्वचा के अनुकूल उत्पादों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

पीयूपीपीपी जैसी समस्या भी हो सकती है

गर्भावस्था के अंतिम महीनों में कुछ महिलाओं को पीयूपीपीपी नाम की त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है। इसमें पेट के स्ट्रेच मार्क्स के आसपास लाल दाने और तेज खुजली दिखाई देती है। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति आमतौर पर गंभीर नहीं होती, लेकिन लगातार परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह जरूरी होती है।

ऐसे लक्षणों में त्वचा को ठंडक पहुंचाने वाले उपाय और मॉइस्चराइजिंग क्रीम मददगार हो सकती हैं। हालांकि किसी भी दवा या क्रीम का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

आईसीपी को नजरअंदाज करना खतरनाक

विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ मामलों में खुजली लिवर से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकती है। इसे इंट्राहेपेटिक कोलेस्टेसिस ऑफ प्रेग्नेंसी यानी आईसीपी कहा जाता है। इस स्थिति में शरीर में बाइल एसिड बढ़ सकता है, जिससे खासतौर पर हथेलियों और तलवों में तेज खुजली होती है।

अगर खुजली रात में ज्यादा बढ़े, शरीर पर रैश न हो और फिर भी लगातार परेशानी बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। डॉक्टरों का कहना है कि आईसीपी मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है, इसलिए समय पर जांच और उपचार बेहद जरूरी होता है।

राहत के लिए अपनाएं सावधानी

खुजली से राहत पाने के लिए डॉक्टर त्वचा को नम बनाए रखने की सलाह देते हैं। बिना खुशबू वाला मॉइस्चराइजर और माइल्ड स्किन केयर प्रोडक्ट्स उपयोगी माने जाते हैं। इसके अलावा ढीले और सूती कपड़े पहनने से त्वचा को आराम मिल सकता है।

बहुत गर्म पानी से नहाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा और ज्यादा सूखी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि खुजली के साथ बच्चे की हलचल कम महसूस हो या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सलाह लेना जरूरी है।

बिना सलाह दवा लेना हो सकता है नुकसानदायक

डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान खुद से दवा लेना सुरक्षित नहीं माना जाता। कई दवाएं गर्भ में पल रहे बच्चे पर असर डाल सकती हैं। इसलिए किसी भी प्रकार की क्रीम, टैबलेट या इलाज शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और समय पर देखभाल से गर्भावस्था के दौरान होने वाली अधिकांश त्वचा समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है। लगातार होने वाली खुजली को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं माना जाता।

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