Protein – ज्यादा प्रोटीन दिमाग को करता है कमजोर, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ…
Protein – हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन दिमाग की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। इस विषय पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि सामान्य परिस्थितियों में अधिक प्रोटीन खाने से व्यक्ति की बुद्धि या मानसिक क्षमता कम हो जाती है। विशेषज्ञ संतुलित आहार को ही बेहतर स्वास्थ्य की सबसे अहम कुंजी मानते हैं।

सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुई चर्चा
हाल के दिनों में भाजपा सांसद कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए भारतीय पारंपरिक भोजन को बेहतर बताया। उन्होंने लोगों को होल फूड्स अपनाने, जंक फूड, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और प्रोटीन शेक का कम सेवन करने की सलाह दी। पोस्ट में उन्होंने यह भी कहा कि अधिक प्रोटीन का सेवन व्यक्ति को कम समझदार बना सकता है। इस दावे के बाद पोषण विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने इस विषय पर अपनी राय रखी।
क्या वैज्ञानिक प्रमाण इस दावे का समर्थन करते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान वैज्ञानिक शोध में ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है जो यह दर्शाता हो कि प्रोटीन का सेवन सीधे तौर पर मस्तिष्क की कार्यक्षमता को नुकसान पहुंचाता है। न्यूट्रीशनिस्ट रिया ओसवाल के मुताबिक, प्रोटीन से मिलने वाले अमीनो एसिड शरीर में न्यूरोट्रांसमीटर बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये रसायन याददाश्त, एकाग्रता और मस्तिष्क के सामान्य कामकाज के लिए आवश्यक माने जाते हैं।
संतुलित आहार सबसे महत्वपूर्ण
कैंसर विशेषज्ञ डॉ. असमा पठान का कहना है कि किसी भी पोषक तत्व का अत्यधिक सेवन लंबे समय तक करना उचित नहीं माना जाता। हालांकि, यह कहना भी सही नहीं होगा कि केवल अधिक प्रोटीन लेने से दिमाग कमजोर हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति प्रोटीन पर अत्यधिक निर्भर हो जाए और फल, सब्जियां, साबुत अनाज तथा अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का सेवन कम कर दे, तो आहार का संतुलन बिगड़ सकता है। इसलिए भोजन में सभी जरूरी पोषक तत्वों का उचित अनुपात होना आवश्यक है।
भारत में प्रोटीन की कमी भी एक चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में बड़ी संख्या में लोग अपनी दैनिक प्रोटीन आवश्यकता भी पूरी नहीं कर पाते। खासकर महिलाएं, बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों में प्रोटीन की कमी अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि लोगों को अपनी उम्र, स्वास्थ्य और जीवनशैली के अनुसार पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन सहित संतुलित आहार लेना चाहिए।
केवल एक पोषक तत्व पर निर्भर रहना ठीक नहीं
पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ रहने के लिए किसी एक खाद्य समूह पर अत्यधिक निर्भर रहने के बजाय विविधता से भरपूर भोजन करना अधिक लाभकारी होता है। दालें, दूध, दही, अंडे, मछली, सोया, मेवे, साबुत अनाज, फल और हरी सब्जियां मिलकर शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं। संतुलित भोजन के साथ नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी अच्छे स्वास्थ्य के लिए उतने ही जरूरी हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य संबंधी किसी भी दावे को अंतिम सत्य मानने के बजाय विश्वसनीय वैज्ञानिक जानकारी और योग्य डॉक्टर या न्यूट्रीशनिस्ट की सलाह पर भरोसा करना चाहिए। किसी भी पोषक तत्व का सेवन व्यक्ति की जरूरत, उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार होना चाहिए। सही मात्रा में लिया गया संतुलित आहार ही लंबे समय तक बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करता है।