DeportationCrisis – यूएई से पाकिस्तानी शियाओं की वापसी पर बढ़ी चिंता
DeportationCrisis – संयुक्त अरब अमीरात से बड़ी संख्या में पाकिस्तानी शिया समुदाय के लोगों को वापस भेजे जाने की खबरों ने पाकिस्तान में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। कई ऐसे लोग, जो वर्षों से खाड़ी देशों में काम कर रहे थे, अचानक नौकरी और आर्थिक सुरक्षा खोकर अपने देश लौटने को मजबूर हुए हैं। इस घटनाक्रम को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने भी गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या ऐसे परिवारों की है जिनकी आय पूरी तरह विदेश से आने वाले पैसों पर निर्भर थी। अचानक हुई कार्रवाई के कारण कई परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन Human Rights Watch ने भी इन घटनाओं से जुड़ी सूचनाओं की जांच शुरू की है।
क्षेत्रीय तनाव के बाद बढ़ी कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक फरवरी के आखिर के बाद से यूएई में पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है। इसी दौरान पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया। पाकिस्तान के कुछ शिया संगठनों का कहना है कि उसी समय से समुदाय विशेष से जुड़े लोगों को अधिक संख्या में हिरासत में लिया जाने लगा।
हालांकि आधिकारिक स्तर पर यूएई सरकार ने अब तक इस विषय पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। लेकिन पाकिस्तान के कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने दावा किया है कि हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।
डिपोर्ट किए गए लोगों ने सुनाई आपबीती
वापस लौटे कई लोगों ने बताया कि उन्हें बहुत कम समय में देश छोड़ने के लिए कहा गया। कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें निजी सामान तक समेटने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। कई मामलों में बैंक खातों और बचत राशि तक पहुंच नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है।
पंजाब प्रांत के एक व्यक्ति ने बताया कि पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने उनकी आय और विदेश भेजे जाने वाले पैसों के बारे में सवाल किए। उन्होंने दावा किया कि उनसे यह भी पूछा गया कि क्या किसी प्रकार से धन ईरान भेजा जाता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
एक अन्य व्यक्ति, जो कई वर्षों तक दुबई में नौकरी कर चुके थे, ने कहा कि उन्हें हिरासत में रखे जाने के बाद सीधे एयरपोर्ट पहुंचा दिया गया। उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया काफी अचानक और तनावपूर्ण थी।
परिवारों के सामने आर्थिक चुनौती
विदेश में काम करने वाले इन लोगों की कमाई पर पाकिस्तान में रहने वाले उनके परिवार निर्भर थे। अब अचानक नौकरी छूटने के बाद कई परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। खासतौर पर उन इलाकों में चिंता अधिक है जहां बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में रोजगार के लिए जाते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में प्रवासी कामगार वापस लौटते हैं तो इसका असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार स्थिति पर भी पड़ सकता है। पाकिस्तान में पहले से मौजूद आर्थिक दबाव के बीच यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।
पाकिस्तान सरकार ने क्या कहा
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने इस मामले पर बयान जारी करते हुए कहा है कि यूएई द्वारा की गई कार्रवाई किसी धार्मिक पहचान के आधार पर नहीं की गई है। मंत्रालय के अनुसार, जिन लोगों को वापस भेजा गया है, वे स्थानीय नियमों के उल्लंघन के मामलों से जुड़े हो सकते हैं।
हालांकि कुछ सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम की आंतरिक समीक्षा की जा रही है। सरकार यह समझने की कोशिश कर रही है कि प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या कितनी है और किन परिस्थितियों में उन्हें वापस भेजा गया।
मानवाधिकार संगठनों की नजर
मानवाधिकार संगठनों ने इस पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति पर कार्रवाई की जाती है तो उसे कानूनी प्रक्रिया और अपने अधिकारों की जानकारी मिलनी चाहिए। फिलहाल इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।