EnergyRoute – बाब-अल-मंडेब जलमार्ग पर शुल्क योजना से बढ़ सकती हैं वैश्विक व्यापार चिंताएं
EnergyRoute – यमन के ईरान समर्थित हूती गुट की ओर से दक्षिणी लाल सागर में गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर शुल्क लगाने की संभावित योजना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री प्रतिबंधों की घोषणा के बाद सामने आई यह जानकारी क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर अब तक हूती गुट की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

समुद्री मार्ग पर शुल्क लगाने की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हूती प्रशासन बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर टोल वसूलने के विकल्प का अध्ययन कर रहा है। यह संकरा समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच बड़ी मात्रा में तेल, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही इसी रास्ते से होती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसी किसी व्यवस्था को लागू करने की समय-सीमा क्या होगी।
क्षेत्रीय घटनाक्रम के बीच बढ़ी हलचल
20 जुलाई को हूती गुट ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री प्रतिबंध लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गईं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि समुद्री गतिविधियों पर अतिरिक्त नियंत्रण या शुल्क लागू करने की कोशिश होती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।
ईरान में हुई बैठकों का दावा
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि इस महीने की शुरुआत में हूती प्रतिनिधिमंडल ने ईरान का दौरा किया था। बताया गया कि वहां हुई चर्चाओं के दौरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर शुल्क वसूलने जैसे विकल्पों पर विचार किया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही संबंधित पक्षों ने इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी किया है।
चीनी जहाजों को लेकर भी अटकलें
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत चीनी जहाजों को संभावित छूट दिए जाने की संभावना पर चर्चा हुई है। हालांकि, इस दावे की भी किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यदि ऐसी कोई नीति लागू होती है तो उसके नियम और दायरा क्या होगा।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है असर
बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यदि इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मार्ग सऊदी अरब सहित खाड़ी देशों के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक समुद्री रास्ता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की बाधा या अतिरिक्त लागत से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, शिपिंग खर्च और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका बनी रह सकती है।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
हूती मीडिया कार्यालय ने अब तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। यदि भविष्य में इस संबंध में कोई औपचारिक निर्णय सामने आता है, तो उसका प्रभाव केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी देखा जा सकता है।