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NuclearDeal – अमेरिका और ईरान समझौते के करीब, वार्ता तेज…

NuclearDeal – अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब दोनों देशों के संभावित समझौते को लेकर बड़ी कूटनीतिक हलचल दिखाई दे रही है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वॉशिंगटन और तेहरान युद्धविराम तथा परमाणु वार्ता से जुड़े एक प्रारंभिक समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। बताया जा रहा है कि दोनों पक्ष एक संक्षिप्त समझौता ज्ञापन पर अंतिम दौर की बातचीत कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य तनाव कम करना और आगे की वार्ताओं का रास्ता तैयार करना है।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रस्तावित समझौते में तत्काल संघर्ष विराम लागू करने और अगले 30 दिनों के भीतर विस्तृत वार्ता पूरी करने की रूपरेखा शामिल है। इसके तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी कुछ गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगाने के लिए तैयार हो सकता है, जबकि अमेरिका प्रतिबंधों में राहत देने और ईरानी संपत्तियों से जुड़े मामलों में प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर विचार कर रहा है।

होर्मुज क्षेत्र में तनाव कम करने पर जोर

सूत्रों के अनुसार बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। दोनों पक्ष समुद्री मार्गों में तनाव कम करने और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने पर चर्चा कर रहे हैं। हाल के दिनों में इस क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी थी।

मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका की ओर से सैन्य गतिविधियां सीमित करने का हालिया फैसला भी इन्हीं कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ कुछ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

परमाणु संवर्धन बना मुख्य मुद्दा

बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम की अवधि और सीमा को लेकर बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका लंबे समय तक नियंत्रण चाहता है, जबकि ईरान अपेाकृत कम अवधि के प्रस्ताव पर जोर दे रहा है।

सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों के बीच मध्य मार्ग तलाशने की कोशिश जारी है। चर्चा इस बात पर भी हो रही है कि यदि समझौते की शर्तों का उल्लंघन होता है तो निगरानी और नियंत्रण की प्रक्रिया किस प्रकार लागू की जाएगी।

निरीक्षण और निगरानी पर भी चर्चा

संभावित समझौते में अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भूमिगत परमाणु सुविधाओं की निगरानी और संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों को जांच की अनुमति देने जैसे प्रस्तावों पर विचार हो रहा है।

इसके अलावा अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडारण और उसके नियंत्रण को लेकर भी अलग-अलग विकल्पों पर बातचीत जारी है। हालांकि इन मुद्दों पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है।

अगले 48 घंटे माने जा रहे अहम

राजनयिक सूत्रों का कहना है कि आने वाले दो दिन इस पूरी प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अमेरिका फिलहाल ईरान की कुछ प्रमुख शर्तों और प्रतिक्रियाओं का इंतजार कर रहा है। यदि प्रारंभिक समझौते पर सहमति बनती है तो आगे की तकनीकी और विस्तृत वार्ताएं दूसरे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हो सकती हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिए हैं कि बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और किसी भी समझौते के लिए स्पष्ट शर्तों की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान सभी पक्षों की जिम्मेदारियों और सीमाओं को स्पष्ट रूप से तय करना जरूरी है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी हुई नजर

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को वैश्विक राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। कई देश इस वार्ता पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि इसका असर मध्य पूर्व की स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौता आगे बढ़ता है तो क्षेत्रीय तनाव कम करने में मदद मिल सकती है, हालांकि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अंतिम सहमति अभी बाकी है।

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