RussiaDiplomacy – पश्चिम एशिया तनाव पर बढ़ी रूस की चिंता, P5 शिखर बैठक का आया प्रस्ताव
RussiaDiplomacy – पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच रूस ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मॉस्को का कहना है कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद क्षेत्र की स्थिति तेजी से अस्थिर हुई है और मौजूदा हालात में अंतरराष्ट्रीय कानून की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी संदर्भ में रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों की एक विशेष बैठक बुलाने की जरूरत पर जोर दिया है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले भी वैश्विक सुरक्षा पर चर्चा के लिए ऐसे शिखर सम्मेलन का प्रस्ताव रख चुके हैं। अब क्रेमलिन का मानना है कि मौजूदा संकट उस विचार को फिर से आगे बढ़ाने का उपयुक्त समय हो सकता है।
पुतिन के पुराने प्रस्ताव को फिर उठाने की अपील
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि दुनिया जिस तरह के हालात से गुजर रही है, वह राष्ट्रपति पुतिन के उस पुराने सुझाव की प्रासंगिकता को फिर सामने लाता है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देशों की बैठक बुलाने की बात कही गई थी। यह प्रस्ताव कोविड-19 महामारी से पहले रखा गया था।
इस बैठक का उद्देश्य वैश्विक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय स्थिरता और बड़े देशों के बीच समन्वय जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा करना था। पेस्कोव के अनुसार, वर्तमान हालात यह संकेत देते हैं कि दुनिया को फिर से संवाद और सामूहिक निर्णय की दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत है।
अंतरराष्ट्रीय कानून पर उठे सवाल
सरकारी चैनल रॉसिया को दिए एक साक्षात्कार में पेस्कोव ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय कानून की प्रभावशीलता कम होती दिखाई दे रही है। उनके मुताबिक, कानूनी ढांचे का औपचारिक अस्तित्व तो है, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर उसका पालन कमजोर पड़ गया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में किसी भी देश से अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने की अपेक्षा करना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि स्वयं यह स्पष्ट नहीं है कि उन नियमों की व्याख्या किस तरह की जा रही है। पेस्कोव का मानना है कि वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य नियमों और सिद्धांतों की पुनर्समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
क्षेत्रीय तनाव ने बढ़ाई अस्थिरता
रूस ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया की स्थिति को बेहद संवेदनशील बताया है। पेस्कोव ने कहा कि इस घटनाक्रम ने पहले से मौजूद कई क्षेत्रीय विवादों और तनावों को और अधिक जटिल बना दिया है।
उनके अनुसार, लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों, राजनीतिक मतभेदों और अधूरे समाधान वाले मुद्दों ने मिलकर एक ऐसा माहौल तैयार कर दिया है, जिसका असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, राजनीतिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका से स्पष्टीकरण की मांग
इस बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी मौजूदा घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपनी रणनीति और भविष्य की योजनाओं के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
लावरोव का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह समझने की आवश्यकता है कि अमेरिकी नीतियां वैश्विक व्यवस्था और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के साथ किस तरह मेल खाती हैं। उनके अनुसार, विश्व राजनीति के इस दौर में पारदर्शिता और संवाद की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
वैश्विक व्यवस्था पर व्यापक असर की आशंका
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और कूटनीतिक समीकरणों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में प्रमुख शक्तियों के बीच संवाद और समन्वय की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
रूस का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देशों के बीच प्रत्यक्ष वार्ता से कई जटिल मुद्दों पर चर्चा का रास्ता खुल सकता है। हालांकि यह देखना बाकी है कि अन्य प्रमुख देश इस प्रस्ताव को किस तरह लेते हैं और क्या निकट भविष्य में ऐसी किसी बैठक की संभावना बनती है।



