अंतर्राष्ट्रीय

Shipping – पश्चिम एशिया तनाव के बीच खाड़ी में फंसे भारतीय जहाज, सरकार सतर्क

Shipping – पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखने लगा है। सरकार ने ताज़ा स्थिति साझा करते हुए बताया है कि फारस की खाड़ी में इस समय भारतीय ध्वज वाले कई जहाज अटके हुए हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस लदी हुई है। यह स्थिति देश में ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा रही है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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खाड़ी में अटके जहाजों की स्थिति स्पष्ट
पोत परिवहन मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल 22 भारतीय जहाज फारस की खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं। इन जहाजों में लगभग 16.7 लाख टन कच्चा तेल, 3.2 लाख टन एलपीजी और करीब 2 लाख टन एलएनजी मौजूद है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि ये जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने का इंतजार कर रहे हैं। इस मार्ग पर तनाव के चलते आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिससे जहाजों की आगे की यात्रा प्रभावित हो रही है।

नाविक सुरक्षित, निगरानी जारी
विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि इन सभी जहाजों पर तैनात 611 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती दिनों में इस क्षेत्र में कुल 28 भारतीय जहाज मौजूद थे, जिनमें से कुछ को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। पिछले सप्ताह दोनों ओर से दो-दो जहाजों को निकालने में सफलता मिली, लेकिन अब भी 22 जहाज पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए हैं। सरकार इनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

किन-किन प्रकार के जहाज शामिल
फंसे हुए जहाजों में विभिन्न प्रकार के पोत शामिल हैं, जो अलग-अलग तरह का माल ढो रहे हैं। इनमें छह एलपीजी कैरियर, एक एलएनजी टैंकर, चार कच्चा तेल टैंकर, एक रासायनिक उत्पाद वाहक, तीन कंटेनर जहाज और दो थोक मालवाहक शामिल हैं। इसके अलावा कुछ जहाज रखरखाव और अन्य कारणों से भी वहीं मौजूद हैं। इस विविधता के कारण स्थिति और भी जटिल हो जाती है, क्योंकि हर जहाज की प्राथमिकता और संचालन अलग-अलग होता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक बेहद अहम मार्ग माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ता है और दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल और गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। हालिया संघर्ष के बाद इस मार्ग पर आवाजाही काफी सीमित हो गई है। पिछले कुछ दिनों में केवल चार जहाज ही इस क्षेत्र को पार कर पाए हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

भारत पर संभावित प्रभाव और तैयारी
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी विदेशों से मंगाता है। ऐसे में होर्मुज मार्ग में किसी भी तरह की बाधा सीधे तौर पर आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि सरकार का कहना है कि वैकल्पिक व्यवस्थाओं और आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि आम उपभोक्ताओं पर इसका असर कम से कम पड़े।

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