झारखण्ड

Audit – रिम्स में जीएसटी नियमों की अनदेखी, ऑडिट में 9.12 करोड़ भुगतान पर उठे सवाल

Audit – राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची में हाउसकीपिंग और सैनिटेशन सेवाओं के भुगतान से जुड़ा एक गंभीर वित्तीय मामला सामने आया है। प्रधान महालेखाकार (ऑडिट), झारखंड की 19 जून को जारी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जीएसटी पंजीकरण रद्द हो जाने के बाद भी एक निजी एजेंसी को जीएसटी सहित भुगतान किया जाता रहा। ऑडिट के अनुसार इस प्रक्रिया में कुल 9.12 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जिससे सरकार को लगभग 1.21 करोड़ रुपये के जीएसटी राजस्व का नुकसान हुआ।

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ऑडिट रिपोर्ट में भुगतान प्रक्रिया पर उठे सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, रिम्स ने सैनिटेशन और हाउसकीपिंग सेवाओं के लिए एम/एस एयूएस प्राइवेट लिमिटेड को भुगतान किया। ऑडिट में बताया गया कि एजेंसी का जीएसटी पंजीकरण 11 सितंबर 2025 को सीजीएसटी एवं जेजीएसटी अधिनियम, 2017 के तहत स्वतः निरस्त हो चुका था। इसके बावजूद संबंधित एजेंसी द्वारा प्रस्तुत टैक्स इनवॉयस के आधार पर जीएसटी सहित भुगतान जारी रखा गया। ऑडिट टीम ने इसे वित्तीय नियंत्रण प्रणाली में गंभीर कमी का संकेत माना है।

आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर भी जताई चिंता

प्रधान महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मामला केवल भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्थान की वित्तीय निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है। लेखा परीक्षा विभाग ने रिम्स प्रशासन से इस संबंध में अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण मांगा है। साथ ही पहले सेवाएं दे चुकी सन फैसिलिटी एजेंसी के भुगतान और जीएसटी अनुपालन की भी विशेष जांच कराने की अनुशंसा की गई है।

कई सुधारात्मक कदम उठाने की सिफारिश

ऑडिट रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें एजेंसी से जीएसटी की राशि ब्याज सहित वसूलने, पूर्व भुगतानों की दोबारा गणना करने, जमा जीएसटी और भुगतान का मिलान करने तथा जीएसटी-टीडीएस की स्थिति स्पष्ट करने की अनुशंसा शामिल है। इसके अलावा प्रत्येक भुगतान से पहले जीएसटीआईएन का ऑनलाइन सत्यापन अनिवार्य करने और संविदा व आउटसोर्सिंग सेवाओं की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी सुझाव दिया गया है।

भुगतान से पहले नहीं हुआ आवश्यक सत्यापन

ऑडिट में यह भी सामने आया कि संबंधित अधिकारियों ने भुगतान जारी करने से पहले एजेंसी के जीएसटी पंजीकरण की वैधता की ऑनलाइन जांच नहीं की। रिपोर्ट के अनुसार इससे सीजीएसटी और जेजीएसटी अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं हो सका। साथ ही जीएसटी-टीडीएस की कटौती और उसके समायोजन की स्थिति भी स्पष्ट नहीं होने के कारण वित्तीय प्रक्रिया पर अतिरिक्त सवाल खड़े हुए हैं।

जीएसटी वसूली के अधिकार पर भी उठा मुद्दा

लेखा परीक्षा रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि जीएसटी पंजीकरण निरस्त होने के बाद संबंधित एजेंसी को टैक्स इनवॉयस जारी करने या जीएसटी वसूलने का अधिकार नहीं था। इसके बावजूद जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच विभिन्न बिलों के आधार पर भुगतान किया गया। रिपोर्ट के अनुसार एजेंसी ने 1,21,10,296 रुपये जीएसटी का दावा किया, जबकि कुल 9,12,39,032 रुपये का भुगतान किया गया। अब ऑडिट विभाग ने इस पूरे मामले में राशि की वसूली, भुगतान की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू करने की अनुशंसा की है।

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