Babulal Marandi Targets Congress: राम और रोजगार के नाम पर छिड़ा सियासी घमासान, क्या कांग्रेस को वाकई विकास से है नफरत…
Babulal Marandi Targets Congress: झारखंड की सियासत में इन दिनों ‘जी-राम-जी’ योजना को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पार्टी द्वारा इस योजना के विरोध किए जाने पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि (Rural development mission) का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े गरीब, जनजातीय और पिछड़े वर्ग के लोगों को सम्मान के साथ आजीविका देना है। मरांडी के अनुसार, कांग्रेस की छटपटाहट इसलिए है क्योंकि यह योजना सीधे तौर पर पारदर्शिता की बात करती है।

भगवान राम और विकसित भारत के नाम से क्यों है परहेज?
भाजपा नेता ने अपने कड़े बयान में कहा कि कांग्रेस को ‘विकसित भारत’ और ‘भगवान श्री राम’ के नाम से ही नफरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल (Babulal Marandi Targets Congress) के तहत इस कल्याणकारी योजना के खिलाफ साजिश रच रहा है। मरांडी ने सोमवार को जारी प्रेस बयान में स्पष्ट किया कि कांग्रेस को लूट और भ्रष्टाचार की ऐसी आदत लग चुकी है कि वह केवल उन्हीं योजनाओं को समर्थन देती है जिसमें बिचौलियों का बोलबाला हो और सरकारी खजाने में सेंधमारी आसान हो।
मनरेगा के नामकरण पर बाबूलाल मरांडी का बड़ा खुलासा
मरांडी ने उन आरोपों का भी जवाब दिया जिसमें कांग्रेस नाम बदलने की राजनीति का मुद्दा उठा रही थी। उन्होंने इतिहास के पन्ने पलटते हुए कहा कि जिस योजना के नाम पर आज हंगामा हो रहा है, उसका शुरुआती नाम महात्मा गांधी के नाम पर नहीं था। वर्ष 1980 में इंदिरा गांधी ने विभिन्न (Employment schemes history) को मिलाकर इसे ‘राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम’ नाम दिया था। बाद में राजीव गांधी ने इसे ‘जवाहर रोजगार योजना’ किया और फिर मनमोहन सरकार ने इसे ‘नरेगा’ और अंततः ‘मनरेगा’ का नाम दिया, जो साबित करता है कि नाम बदलने की प्रथा कांग्रेस ने ही शुरू की थी।
गांधी परिवार के नाम पर 600 संस्थाओं का कब्जा
बाबूलाल मरांडी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कांग्रेस पार्टी ने देश की लगभग 600 संस्थाओं, पुरस्कारों और योजनाओं का नाम केवल गांधी परिवार के सदस्यों पर रखा है। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि (Nationalist leaders legacy) जैसे सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और लाल बहादुर शास्त्री को हमेशा हाशिए पर रखा गया। खेल से कोई संबंध न होने के बावजूद पुरस्कारों के नाम परिवार विशेष पर रखे गए, जो राष्ट्रभक्तों के साथ अन्याय था।
झारखंड में अटल क्लीनिक के नाम पर हुई राजनीति का जिक्र
झारखंड की स्थानीय राजनीति पर प्रहार करते हुए मरांडी ने याद दिलाया कि कैसे राज्य की कांग्रेस समर्थित सरकार ने झारखंड के निर्माता अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान को ठेस पहुंचाई। उन्होंने कहा कि (Jharkhand political updates) के दौरान पूर्ववर्ती सरकार ने ‘अटल क्लीनिक’ का नाम बदलकर ‘मदर टेरेसा क्लीनिक’ कर दिया था। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी अपने या अपने परिवार के नाम पर किसी योजना का नामकरण नहीं किया, बल्कि उसे सेवा के भाव से जोड़ा।
गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति और लोक कल्याण का नया मार्ग
प्रधानमंत्री मोदी के विजन की तारीफ करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि वर्तमान सरकार ने नाम बदलने को सेवा और स्वाभिमान से जोड़ा है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे (Public service transformation) के तहत ‘राजभवन’ अब ‘लोक भवन’ बन गया है, ‘राजपथ’ अब ‘कर्तव्य पथ’ कहलाता है और ‘रेस कोर्स’ को अब ‘लोक कल्याण मार्ग’ के नाम से जाना जाता है। पीएमओ को ‘सेवा तीर्थ’ का नाम देकर यह संदेश दिया गया है कि सत्ता का केंद्र केवल जनता की सेवा के लिए समर्पित है।
ग्रामीण भारत का बदलता स्वरूप और पुराने मॉडल की विफलता
मरांडी ने तर्क दिया कि 2005 में शुरू हुई मनरेगा अब पुराने ढर्रे पर चल रही है, जबकि आज का ग्रामीण भारत पूरी तरह बदल चुका है। गांवों में कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और (Rural economy evolution) के कारण लोगों की जरूरतें अब विविध हो गई हैं। पुराना ‘ओपन एंडेड’ मॉडल अब मौजूदा जरूरतों के साथ मेल नहीं खाता। इसीलिए, नई योजना को ग्रामीण क्षेत्रों की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्थित और सुव्यवस्थित किया गया है।
भ्रष्टाचार पर एआई और टेक्नोलॉजी की सर्जिकल स्ट्राइक
कांग्रेस सरकार के दौरान मनरेगा में पारदर्शिता की कमी का जिक्र करते हुए मरांडी ने बताया कि नई ‘जी-राम-जी’ योजना आधुनिक तकनीक से लैस होगी। इस नई व्यवस्था में (Advanced technology in governance) का भरपूर उपयोग किया जाएगा, जिसमें रियल टाइम डेटा अपलोड होगा और मोबाइल के जरिए हर काम की निगरानी होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए किसी भी तरह के फ्रॉड या फर्जीवाड़े को तुरंत पकड़ा जा सकेगा, जिससे गरीबों का हक उन्हें सीधे मिल सकेगा।
अंतिम लक्ष्य: गरीबों के जीवन स्तर में आमूलचूल सुधार
बाबूलाल मरांडी ने लेख के अंत में यह स्पष्ट किया कि तकनीक और सुशासन के मेल से ही असल बदलाव संभव है। ‘जी-राम-जी’ योजना के माध्यम से (Poverty alleviation strategies) को एक नया आयाम मिलेगा। जब सही लाभार्थियों को बिना किसी भ्रष्टाचार के काम मिलेगा, तभी मजदूरों और पिछड़ों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। भाजपा का दावा है कि यह योजना आने वाले समय में ग्रामीण विकास की रीढ़ साबित होगी, जिसे रोकने के लिए विपक्ष झूठा भ्रम फैला रहा है।


