CBI – हजारीबाग कोर्ट ने रमेश पांडे हत्याकांड में तीन को दोषी ठहराया
CBI – हजारीबाग के बहुचर्चित रूपेश पांडेय हत्या मामले में सोमवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी करार दिया, जबकि दो को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार ने दोषियों की सजा सुनाने के लिए 5 फरवरी की तिथि तय की है। अदालत में अभियुक्तों की पेशी जेल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई गई।

दोषियों की पहचान
रूपेश पांडेय की हत्या में दोषी पाए गए आरोपियों में मो. असलम अंसारी उर्फ पप्पु मियां, मो. कैफ और मो. गुरफान शामिल हैं। वहीं, ठोस साक्ष्य न होने के कारण मो. इरफान और इश्तेखार मियां को अदालत ने बरी कर दिया। मामले में शामिल एक नाबालिग आरोपी की सुनवाई अभी हजारीबाग स्थित जेजे बोर्ड में लंबित है।
हत्या की भयावह घटना
6 फरवरी 2022 को शाम लगभग 5 बजे 18 वर्षीय रूपेश पांडेय अपने चाचा के साथ बरही में सरस्वती पूजा देखने गया था। विसर्जन जुलूस के दौरान एक उन्मादी भीड़ ने उसे पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद बरही थाना में 27 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। पुलिस ने तेज़ कार्रवाई करते हुए सात फरवरी को चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
जांच और न्यायिक प्रक्रिया
झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस एसके द्विवेदी ने 2 सितंबर 2022 को हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया। रूपेश की मां उर्मिला पांडेय ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। आरोपियों पर हत्या और आपराधिक साजिश समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा चल रहा है।
गवाहियों और सबूत
सीबीआई की ओर से वरिष्ठ पीपी प्रियांशु सिंह ने अदालत में कुल 15 गवाह प्रस्तुत किए। इन गवाहियों में घटना के साक्ष्य और अपराधियों की भूमिका को स्पष्ट रूप से सामने लाया गया।
परिवार की प्रतिक्रिया
सीबीआई कोर्ट के फैसले के दिन रूपेश पांडेय के पिता सिकंदर पांडेय सुबह 10.30 बजे सहयोगियों के साथ अदालत पहुंचे। तीन दोषियों को सजा मिलने के बाद उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला संतोषजनक है, लेकिन उनका ध्यान अब भी मुख्य आरोपी इश्तेखार मियां की ओर है। इश्तेखार घटना के तुरंत बाद से फरार है और चार साल से उसकी तलाश जारी है। सिकंदर पांडेय ने स्पष्ट किया कि वे बरी हुए आरोपी के खिलाफ ऊपरी न्यायालय में चुनौती देंगे और आवश्यकता पड़ने पर इसके आगे भी कार्रवाई करेंगे।



