झारखण्ड

Jharkhand Governance Success: सरकार खुद पहुँची आपके घर, ‘आपकी योजना’ अभियान ने 30 दिनों में रच दिया नया इतिहास

Jharkhand Governance Success: झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुहिम ‘आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार’ ने राज्य में सुशासन की एक नई परिभाषा लिखी है। मात्र 30 दिनों के भीतर सरकार ने प्राप्त हुए कुल आवेदनों में से 79 प्रतिशत का सफलतापूर्वक निष्पादन कर दिया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जब प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम होती है, तो समस्याओं का समाधान कितनी तेजी से संभव है। राज्य के सभी 24 जिलों में आयोजित विशेष कैंपों के माध्यम से सरकार ने सीधे ग्रामीणों से संवाद किया और उनकी फाइलों पर जमी धूल को हटाकर उन्हें हकीकत में बदला।

Jharkhand Governance Success
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आंकड़ों की जुबानी सफलता की कहानी: 12.94 लाख आवेदनों ने दी दस्तक

इस विशेष अभियान के दौरान झारखंड के कोने-कोने से कुल 12,94,915 आवेदन सरकार के पास पहुँचे थे। (Public Service Delivery) की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, प्रशासनिक अमले ने दिन-रात एक कर इनमें से 10,22,901 आवेदनों का मौके पर या त्वरित प्रक्रिया के तहत निपटारा कर दिया। शेष बचे 2,72,014 आवेदनों पर भी युद्धस्तर पर कार्य जारी है। मुख्यमंत्री के विजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब जनता को दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं, बल्कि दफ्तर खुद जनता के द्वार तक चलकर आएगा।

प्रमाण पत्रों का ‘सुपरफास्ट’ निष्पादन: आय और जाति प्रमाण पत्र में बनी बढ़त

शिविरों में कुल 14 मुख्य जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें सबसे शानदार प्रदर्शन ‘आय प्रमाण पत्र’ के मामले में रहा, जहाँ प्राप्त हुए कुल आवेदनों में से 97% का निष्पादन कर दिया गया। इसी तरह (E-Governance Services) को मजबूती देते हुए जाति प्रमाण पत्र और स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र से जुड़े आवेदनों का भी 94-94 प्रतिशत निपटारा किया गया। इससे विद्यार्थियों और युवाओं को अपनी शिक्षा और नौकरी की प्रक्रियाओं में काफी सहूलियत मिली है, जो पहले महीनों तक इन कागजों के लिए भटकते रहते थे।

गिरिडीह बना शिविरों का गढ़: पंचायत स्तर पर सेवा का अधिकार सप्ताह

इस अभियान के तहत कुल 5226 शिविर लगाए गए, जिनमें गिरिडीह जिला सबसे अव्वल रहा। गिरिडीह की पंचायतों और प्रखंडों में कुल 404 शिविर आयोजित किए गए। इसके अलावा (District Level Camps) की सूची में रांची 372 शिविरों के साथ दूसरे और धनबाद 350 शिविरों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। बोकारो, पलामू और हजारीबाग जैसे जिलों ने भी 300 के करीब शिविर लगाकर यह सुनिश्चित किया कि कोई भी ग्रामीण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाए। सिमडेगा, लोहरदगा और खूंटी जैसे सुदूर क्षेत्रों में भी 100 से अधिक शिविर लगाकर अंतिम व्यक्ति तक पहुँच बनाई गई।

सेवा का अधिकार सप्ताह: अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं की सीधी पहुँच

21 से 28 नवंबर तक चले ‘सेवा का अधिकार सप्ताह’ का मुख्य उद्देश्य सरकार की योजनाओं को पारदर्शी बनाना था। मुख्य सचिव के कड़े निर्देशों के बाद सभी जिलों के उपायुक्तों ने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक पंचायत और वार्ड में कम से कम एक (Community Welfare Camp) अवश्य आयोजित हो। इन शिविरों में न केवल पुराने लंबित मामलों को सुलझाया गया, बल्कि ग्रामीणों को ‘अबुआ आवास’, ‘सर्वजन पेंशन’ और ‘सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना’ जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी दी गई।

सुशासन का नया संकल्प: डिजिटल और जमीनी सक्रियता का संगम

झारखंड सरकार का यह अभियान अब एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। शिविरों में प्राप्त फीडबैक और आवेदनों के त्वरित निष्पादन ने (Good Governance Jharkhand) की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी है। सरकार का संकल्प है कि 2026 की शुरुआत तक शेष बचे हुए आवेदनों का भी शत-प्रतिशत निपटारा कर दिया जाए। यह मुहिम केवल कागज बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के गरीब और वंचित वर्ग के भीतर व्यवस्था के प्रति विश्वास बहाल करने की एक सफल कोशिश है।

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