झारखण्ड

JharkhandTET – भाषाई विवाद में उलझा शिक्षक पात्रता परीक्षा विज्ञापन रद्द होने की तैयारी

JharkhandTET – झारखंड में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। राज्य में प्रस्तावित शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़ा हालिया विज्ञापन रद्द होने की स्थिति में पहुंच गया है। इसके पीछे मुख्य वजह क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर खड़ा हुआ विवाद है, जिस पर अब तक सहमति नहीं बन सकी है। इस अनिश्चितता के चलते आवेदन प्रक्रिया भी फिलहाल अधर में लटक गई है।

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कैबिनेट में सहमति न बनने से अटका फैसला

पिछले महीने झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने 21 अप्रैल से 21 मई तक आवेदन लेने की घोषणा करते हुए परीक्षा का विज्ञापन जारी किया था। यह विज्ञापन मंत्रिपरिषद की संभावित मंजूरी को ध्यान में रखकर जारी किया गया था। हालांकि, हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। कई मंत्रियों ने नियमावली के कुछ प्रावधानों पर खुलकर आपत्ति जताई, जिसके चलते मामला फिलहाल टाल दिया गया है।

क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर उठा विवाद

इस पूरे मामले की जड़ में भाषाई असंतुलन को लेकर उठी आपत्तियां हैं। प्रस्तावित नियमावली में भोजपुरी, अंगिका और मगही जैसी भाषाओं को शामिल नहीं किया गया, जबकि ये राज्य के कई जिलों में व्यापक रूप से बोली जाती हैं। इसके विपरीत, उड़िया भाषा को सूची में स्थान दिया गया, जो सीमित क्षेत्रों तक ही सीमित है। इसी असमानता को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने विरोध दर्ज कराया। कैबिनेट बैठक में भी कुछ मंत्रियों ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए संशोधन की मांग रखी।

नियमावली पर फिलहाल लगी रोक

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा 26 मार्च को जारी की गई झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली 2026 को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। यह अधिसूचना मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद जारी की गई थी, लेकिन कैबिनेट से अंतिम स्वीकृति नहीं मिल पाने के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। अब जब तक भाषाई मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय नहीं हो जाता, तब तक आगे की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ेगी।

संशोधन की स्थिति में विज्ञापन वापस लेना तय

यदि सरकार नियमावली में बदलाव करते हुए भोजपुरी, अंगिका और मगही को शामिल करने का निर्णय लेती है, तो मौजूदा विज्ञापन को वापस लेना अनिवार्य हो जाएगा। ऐसे में पूरी प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करना पड़ेगा। दूसरी ओर, यदि बिना संशोधन के नियमावली लागू की जाती है, तो इन भाषाओं के बिना ही आवेदन प्रक्रिया शुरू हो सकती है, जो फिर से विवाद को जन्म दे सकती है।

वर्षों से लंबित है शिक्षक पात्रता परीक्षा

झारखंड में शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन लंबे समय से नियमित नहीं हो पाया है। अब तक यह परीक्षा केवल 2012 और 2016 में ही आयोजित की गई है। नियमों के अनुसार हर वर्ष परीक्षा होनी चाहिए, लेकिन पिछले एक दशक से यह प्रक्रिया ठप पड़ी है। इसका सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा है जिन्होंने 2016 के बाद बीएड की पढ़ाई पूरी की है। वे न तो परीक्षा में शामिल हो पा रहे हैं और न ही शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बन पा रहे हैं।

अभ्यर्थियों में बढ़ रही चिंता

लगातार हो रही देरी और अनिश्चितता ने अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। कई उम्मीदवार लंबे समय से इस परीक्षा के आयोजन का इंतजार कर रहे हैं। अब विज्ञापन रद्द होने की संभावना ने उनकी तैयारी और भविष्य को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। अभ्यर्थी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द ही इस विवाद का समाधान निकालकर परीक्षा प्रक्रिया को स्पष्ट दिशा देगी।

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