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BankFraud – सुप्रीम कोर्ट में अनिल अंबानी मामले पर हुई अहम सुनवाई

BankFraud – अनिल धीरूभाई अंबानी समूह से जुड़े कथित बैंकिंग धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अहम सुनवाई हुई। मामले के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, इस तरह के सवालों का जवाब सार्वजनिक रूप से देना संभव नहीं है। उन्होंने यह टिप्पणी तब की जब सुनवाई के दौरान अनिल अंबानी की गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठाए गए।

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यह मामला कथित तौर पर 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक के बैंकिंग फ्रॉड से जुड़ा हुआ है। अदालत इस मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और प्रगति पर नजर बनाए हुए है। मामले की अगली सुनवाई अब 8 मई को होगी।

सुनवाई में उठे गिरफ्तारी को लेकर सवाल

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय और अन्य एजेंसियों ने कई कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है, लेकिन मुख्य आरोपी बताए जा रहे अनिल अंबानी के खिलाफ अब तक गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई नहीं हुई।

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जांच एजेंसियां अपनी प्रक्रिया के अनुसार काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति विशेष के बारे में यह बताना संभव नहीं है कि उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया या क्यों नहीं किया जा रहा है।

अदालत ने मांगी जांच की स्थिति रिपोर्ट

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत को बताया गया कि सीबीआई और ईडी ने मामले से जुड़ी नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी है।

यह जनहित याचिका पूर्व नौकरशाह ईएएस शर्मा की ओर से दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई है कि एडीएजी समूह और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ कथित ऋण अनियमितताओं की जांच अदालत की निगरानी में कराई जाए।

कपिल सिब्बल ने मांगा अतिरिक्त समय

अनिल अंबानी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य ऐसे हैं जिन्हें अब तक किसी अदालत के सामने विस्तार से नहीं रखा गया है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर विचार करने से पहले संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। अदालत ने यह भी दोहराया कि उसकी प्राथमिकता निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना है।

पहले भी जताई गई थी नाराजगी

इस मामले में इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठा चुका है। अदालत ने पिछली सुनवाई में सीबीआई और ईडी की धीमी जांच प्रक्रिया पर असंतोष जताया था।

न्यायालय का कहना था कि इतने बड़े वित्तीय मामले में जांच तेज और स्पष्ट होनी चाहिए। फिलहाल सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अब अगली सुनवाई 8 मई को होगी, जिसमें आगे की दिशा तय की जा सकती है।

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