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Climate Change – सुपर अल नीनो से बढ़ेगी गर्मी, मौसम पर बड़ा असर संभव

Climate Change – गर्मियों की शुरुआत के साथ ही बढ़ती तपिश ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है, लेकिन इस बार हालात सामान्य नहीं रहने वाले। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले महीनों में ‘सुपर अल नीनो’ का प्रभाव देखने को मिल सकता है, जो बीते कई दशकों के तापमान रिकॉर्ड को चुनौती दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के चलते वैश्विक स्तर पर तापमान में असामान्य वृद्धि और मौसम के चरम रूप देखने को मिल सकते हैं। भारत समेत कई देशों में इसका असर अलग-अलग रूपों में सामने आ सकता है।

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अल नीनो की प्रक्रिया को समझना जरूरी

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसका संबंध प्रशांत महासागर के तापमान से होता है। सामान्य स्थिति में समुद्र का गर्म पानी एशिया और ऑस्ट्रेलिया की दिशा में बहता है, जिससे मौसम संतुलित रहता है। लेकिन अल नीनो के दौरान यह प्रवाह कमजोर पड़ जाता है या दिशा बदल लेता है। इसके कारण समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने लगता है और इसका असर हवाओं, बारिश और तापमान के पैटर्न पर पड़ता है। यही बदलाव वैश्विक मौसम को प्रभावित करता है।

सुपर अल नीनो क्यों माना जा रहा है गंभीर

जब समुद्र के तापमान में सामान्य से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की जाती है, तब स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाती है। वैज्ञानिक इसे ‘सुपर अल नीनो’ कहते हैं। इस स्थिति में तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तक पहुंच सकती है, जो मौसम चक्र को असंतुलित कर देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब यह घटना ग्लोबल वार्मिंग के साथ मिलती है, तो प्रभाव और ज्यादा तीव्र हो जाता है। इसी वजह से इस बार अत्यधिक गर्मी और असामान्य मौसम की आशंका जताई जा रही है।

वैज्ञानिकों की चेतावनी और पुराने रिकॉर्ड का संदर्भ

विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के अध्ययन बताते हैं कि 1950 के बाद कुछ ही बार इतनी तीव्र स्थिति बनी है। 1982-83, 1997-98 और 2015-16 में भी इसके प्रभाव देखे गए थे। इस बार भी कई मॉडल संकेत दे रहे हैं कि तापमान में तेज उछाल संभव है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर जा सकता है, जिससे वैश्विक जलवायु प्रभावित होगी। वैज्ञानिक समुदाय इसे एक महत्वपूर्ण चेतावनी के रूप में देख रहा है।

भारत में गर्मी और लू का असर बढ़ने की आशंका

भारत में इसका सीधा असर तापमान पर पड़ सकता है। खासकर उत्तर और मध्य क्षेत्रों में गर्मी अधिक तीव्र हो सकती है। लू के दिन बढ़ सकते हैं और तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर जा सकता है। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ने की संभावना है। लंबे समय तक रहने वाली गर्मी आम जनजीवन को प्रभावित कर सकती है और बिजली व पानी की मांग भी बढ़ा सकती है।

मानसून पर असर और सूखे की स्थिति

अल नीनो का भारतीय मानसून से गहरा संबंध माना जाता है। जब यह घटना मजबूत होती है, तो मानसून कमजोर पड़ सकता है। इस बार भी बारिश कम होने की आशंका जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो कई राज्यों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। इसका सीधा असर जल संसाधनों और कृषि पर पड़ेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

खेती और महंगाई पर संभावित प्रभाव

कम बारिश और बढ़ती गर्मी का असर फसलों पर पड़ना तय माना जा रहा है। धान, गन्ना और अन्य प्रमुख फसलों की पैदावार घट सकती है। इससे खाद्य आपूर्ति प्रभावित होगी और कीमतों में वृद्धि हो सकती है। साथ ही, जल संकट गहराने की भी संभावना है, क्योंकि नदियों और जलाशयों का स्तर कम हो सकता है। यह स्थिति शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए चुनौती बन सकती है।

दुनिया के अन्य हिस्सों में चरम मौसम की संभावना

इस घटना का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा। दक्षिण अमेरिका में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है, जबकि ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में सूखा और जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इस तरह ‘सुपर अल नीनो’ एक वैश्विक चुनौती के रूप में उभर सकता है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रूप में असर दिखाएगा।

आने वाले महीनों में स्थिति पर नजर

मौजूदा समय में स्थिति सामान्य मानी जा रही है, लेकिन समुद्र के अंदर तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कई मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि मध्य वर्ष तक यह घटना विकसित हो सकती है और साल के अंत तक मजबूत रूप ले सकती है। यदि ऐसा होता है, तो आने वाले सालों में तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है। विशेषज्ञ लगातार इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और समय-समय पर चेतावनी जारी कर रहे हैं।

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