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Himanta Biswa Sarma: दल-बदल वाले CM ने खुद ही खोला राज, क्यों हर पल कट्टर भाजपाई बनने की रहती है बेचैनी…

Himanta Biswa Sarma: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर कांग्रेस पर तीखा व्यंग्य किया और कहा कि वह अब इतने ज्यादा भाजपा से जुड़ चुके हैं कि यह तक भूल जाते हैं कि कभी कांग्रेस में थे (political-commentary)। आज तक के कार्यक्रम में पूछे गए सवाल पर मजाकिया अंदाज़ में उन्होंने कहा, “मैं भी भूल गया हूं, और सबको भूल जाना चाहिए।” सरमा ने कहा कि वह “अच्छा बीजेपी” बनने की कोशिश करते हैं और पूरी तरह “कट्टर बीजेपी” बनने का प्रयास जारी रखते हैं।

Himanta Biswa Sarma
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‘बीजेपी से ज्यादा बीजेपी बनने की कोशिश करता हूं’—सरमा का बयान चर्चा में

जब कार्यक्रम में उनसे पूछा गया कि अब तो कोई यह विश्वास ही नहीं करता कि आप कभी कांग्रेस में थे, सरमा ने इसे भी हंसते हुए टाल दिया (public-reaction)। उन्होंने कहा, “बीजेपी से ज्यादा तो बीजेपी नहीं हो सकता, पर अच्छा बीजेपी होने की कोशिश करता हूं।” उनका यह बयान सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक खूब चर्चा में रहा क्योंकि यह उनकी पहचान भाजपा के प्रमुख रणनीतिक चेहरों में से एक के रूप में और मजबूत करता है।


2015 में छोड़ी कांग्रेस, परिवारवाद पर लगाए थे गंभीर आरोप

हिमंत बिस्वा सरमा ने वर्ष 2015 में कांग्रेस को अलविदा कह दिया था (party-switching)। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर परिवारवाद और अंदरूनी खींचतान के आरोप लगाए थे। सरमा ने दावा किया था कि कांग्रेस में उनकी अनदेखी तब शुरू हुई जब पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई राजनीति में आए। कांग्रेस में रहते हुए वह मंत्री रह चुके थे, लेकिन भाजपा में आने के बाद न केवल मंत्री बने बल्कि आगे चलकर असम के मुख्यमंत्री भी बने—जो उनकी राजनीतिक यात्रा का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।


असम की सुरक्षा को लेकर सरमा का बड़ा संदेश: ‘सामुदायिक रक्षा तंत्र बने’

सरमा ने गुरुवार को लोगों से अपील की कि वे राज्य की सुरक्षा के लिए सामुदायिक स्तर पर स्वैच्छिक रक्षा तंत्र बनाएं (community-security)। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल सरकार के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि असम सुरक्षित और अतिक्रमण-मुक्त बना रहे।


अतिक्रमणकारियों का सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार करने की अपील

मुख्यमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि वे उन व्यक्तियों का सामाजिक और आर्थिक रूप से बहिष्कार करें जो सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करते हैं (land-protection)। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को समुदाय में जगह नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि वे प्रदेश की सुरक्षा, संसाधनों और सामाजिक संतुलन को प्रभावित करते हैं।


“अतिक्रमण करने वालों को रोकें… पहले से मौजूद हैं तो हटाएँ”—सरमा का सख्त रुख

पत्रकारों से बातचीत में सरमा ने साफ कहा कि अतिक्रमण करने वालों को किसी भी हालत में जगह नहीं मिलनी चाहिए (law-enforcement)। उन्होंने कहा, “हमें उन्हें आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। लेकिन अगर वे ऊपरी असम के कुछ स्थानों पर पहले से मौजूद हैं, तो हम उन्हें वहां से हटा देंगे, जैसा हमने उरीयमघाट में किया था।” उनका यह बयान सरकार की ज़ीरो-टॉलरेंस नीति को दोहराता है।


उरीयमघाट में बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान—11,000 बीघे जमीन मुक्त

उरीयमघाट का मामला असम में सबसे बड़े बेदखली अभियानों में से एक रहा है (eviction-drive)। नगालैंड सीमा पर स्थित रेंगमा संरक्षित वन में राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर लगभग 11,000 बीघे (करीब 1,500 हेक्टेयर) अतिक्रमित भूमि को खाली कराया। यह ऑपरेशन राज्य सरकार के अनुसार पर्यावरण संरक्षण एवं अवैध कब्जों पर नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण कदम था।


1,800 परिवार हुए प्रभावित, अधिकांश मुस्लिम समुदाय से—सियासी बहस तेज

अभियान से लगभग 1,800 परिवार प्रभावित हुए, जिनमें अधिकतर मुस्लिम समुदाय के थे (minority-issues)। इस वजह से राजनीतिक विवाद भी बढ़ा। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अभियान चयनात्मक था, जबकि सरकार का दावा था कि कार्रवाई केवल अवैध अतिक्रमण के खिलाफ थी, न कि किसी समुदाय विशेष के। यह मुद्दा असम की राजनीति में बड़े विमर्श में बदल चुका है।


सरमा का कहना—“सरकार अकेले असम को सुरक्षित नहीं बना सकती, सबको योगदान देना होगा”

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य की सुरक्षा केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं है (state-security)। उन्होंने कहा, “सरकार अकेले असम को ‘सुरक्षित’ नहीं बना सकती। सभी को इस प्रक्रिया में योगदान देना होगा।” यानी सरकार चाहती है कि लोग भी अतिक्रमणकारियों की पहचान और शिकायत में सक्रिय भूमिका निभाएँ।


कांग्रेस पर हमला और सुरक्षा संदेश—दोनों ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी

सरमा के कांग्रेस पर कटाक्ष और सुरक्षा को लेकर सख्त बयान दोनों मिलकर असम में नई राजनीतिक बहस को जन्म दे रहे हैं (political-debate)। विपक्ष इसे ध्रुवीकरण का प्रयास बता रहा है, वहीं भाजपा समर्थक इसे “मजबूत नेतृत्व” का प्रतीक बता रहे हैं। सरमा लगातार राष्ट्रीय स्तर पर भी बीजेपी के एक प्रमुख चेहरे के रूप में उभर रहे हैं, इसलिए उनके हर बयान का असर सिर्फ असम तक सीमित नहीं रहता।


असम की राजनीति में सरमा का कद और बढ़ा

इन बयानों के बाद यह साफ हो गया है कि सरमा भाजपा के “गो टू मैन” के रूप में अपनी भूमिका और मजबूत करते जा रहे हैं (leadership-image)। चाहे कांग्रेस के खिलाफ टिप्पणी हो या अतिक्रमण पर सख्ती—हर मुद्दे पर उनका दृढ़ रुख उन्हें असम की राजनीति में एक निर्णायक नेता के रूप में स्थापित कर रहा है।

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