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US-India Trade Deal – ट्रंप की घोषणा से रिश्तों को नई दिशा

US-India Trade Deal – सोमवार देर रात अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ एक बड़े व्यापार समझौते की सार्वजनिक घोषणा कर दी। उन्होंने अपने परिचित अंदाज़ में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर बड़े अक्षरों और भारी-भरकम दावों के साथ यह जानकारी साझा की। हालांकि, इस अहम घटनाक्रम की झलक इससे पहले ही नई दिल्ली में मिल चुकी थी, जब ट्रंप के करीबी सहयोगी और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अप्रत्यक्ष रूप से इसकी ओर संकेत दिए थे। केवल एक महीने पहले पदभार संभालने वाले 38 वर्षीय गोर ऐसे समय में नई जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब टैरिफ विवाद, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और भू-राजनीतिक चुनौतियां भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा तय कर रही हैं। इस पृष्ठभूमि में वे दोनों देशों के रिश्तों को नया आकार देने वाले ट्रंप प्रशासन के प्रमुख चेहरों में गिने जा रहे हैं।

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Us-india Trade Deal – ट्रंप की घोषणा से रिश्तों

शुरुआती दिनों से ही रचनात्मक रुख

राजदूत बनने से पहले ही गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ट्रंप की ओर से एक व्यक्तिगत उपहार भिजवाया था—दोनों नेताओं की हस्ताक्षरित तस्वीर, जिस पर लिखा था, “मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, आप महान हैं।” इस बीच ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत की रूस के साथ निकटता पर सवाल उठाए और टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी भी दी, लेकिन गोर का सार्वजनिक रुख लगातार सहयोगात्मक रहा। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने स्पष्ट कहा था कि व्यापार और तकनीकी साझेदारी पर दोनों पक्ष सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। मौजूदा समझौता उसी दिशा में आगे बढ़ता कदम माना जा रहा है।

उज्बेकिस्तान से अमेरिका तक की यात्रा

सर्जियो गोर की जीवन कहानी आधुनिक प्रवास और अवसरों की मिसाल है। उनका जन्म 1986 में तत्कालीन सोवियत संघ के उज्बेकिस्तान में सर्गेई गोरोखोव्स्की के रूप में हुआ था। बाद में उन्होंने अपना नाम छोटा कर ‘सर्जियो गोर’ कर लिया। उनका परिवार पहले माल्टा गया और फिर 1990 के दशक के अंत में अमेरिका में बस गया, जहां उन्हें नागरिकता मिली। उनके माता-पिता रूसी मूल के हैं और उनकी मां के पास इज़राइल की नागरिकता भी थी। जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में स्नातक करने के बाद उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर अपनी पहचान बनाई। शुरुआती दौर में उन्होंने सीनेटर रैंड पॉल के कार्यालय में काम किया और धीरे-धीरे ट्रंप के करीब पहुंचते गए।

ट्रंप के भरोसेमंद रणनीतिक सहयोगी

2020 के चुनाव में गोर ने ‘ट्रंप विक्ट्री फाइनेंस कमेटी’ के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और धन जुटाने में अपनी क्षमता साबित की। चुनावी हार के बावजूद वे ट्रंप के प्रति वफादार बने रहे। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ मिलकर एक प्रकाशन कंपनी शुरू की, जिसने ट्रंप से जुड़ी कई चर्चित किताबें प्रकाशित कीं। राजदूत बनने से पहले गोर व्हाइट हाउस के कार्मिक कार्यालय के निदेशक थे, जहां उन्होंने हजारों संघीय नियुक्तियों में वैचारिक निष्ठा को प्राथमिकता दी। ट्रंप परिवार से उनकी नजदीकी इतनी गहरी है कि फ्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो रिसॉर्ट में उनकी सक्रिय मौजूदगी के कारण उन्हें अनौपचारिक रूप से ‘मेयर ऑफ मार-ए-लागो’ कहा जाता है।

नई दिल्ली में नई पारी और ‘Pax Silica’

अगस्त 2025 में उनकी नियुक्ति की घोषणा हुई और जनवरी 2026 में उन्होंने आधिकारिक रूप से कार्यभार संभाला। नई दिल्ली पहुंचते ही उन्होंने ट्रंप और मोदी के व्यक्तिगत तालमेल पर जोर दिया। उनका कहना था कि सच्चे मित्र असहमति के बावजूद बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं। इसी दौरान उन्होंने दो अहम बातें कहीं—ट्रंप के अगले एक-दो वर्षों में भारत दौरे की संभावना और भारत को ‘पैक्स सिलिका’ गठबंधन में शामिल होने का न्योता, जिसका लक्ष्य सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ढांचे को मजबूत करना है।

टैरिफ कटौती और व्यापार समझौते की झलक

गोर की कूटनीतिक सक्रियता तब रंग लाती दिखी जब अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का निर्णय लिया। इससे ठीक पहले गोर ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी प्रधानमंत्री मोदी से बात की है। कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने दावा किया कि भारत 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी उत्पाद खरीदेगा और अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ शून्य कर देगा। प्रधानमंत्री मोदी ने समझौते की पुष्टि तो की, लेकिन ‘जीरो टैरिफ’ वाले दावे पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की। इस पर पूछे जाने पर गोर ने संतुलित जवाब देते हुए कहा कि व्यापार वार्ताओं की बारीकियां विशेषज्ञों पर छोड़नी चाहिए। उन्होंने बड़े अक्षरों में लिखते हुए कहा कि यह खबर ऐतिहासिक है और भारत-अमेरिका संबंधों में असीम संभावनाएं मौजूद हैं।

इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि दोनों देशों के रिश्ते केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और तकनीकी साझेदारी की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं।

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