लाइफ स्टाइल

Winter Morning Laziness Science: जानें क्यों सर्दियों की सुबह बिस्तर छोड़ना बन जाता है दुनिया का सबसे कठिन काम…

Winter Morning Laziness Science: सर्दियों की सुबह शायद दुनिया का सबसे हसीन और उतना ही मुश्किल समय होता है। रजाई की गर्माहट वाले उस मखमली सुकून को छोड़कर ठंडी हवाओं का सामना करना किसी जंग जीतने जैसा लगता है। अक्सर जो लोग समय पर नहीं उठ पाते, वे खुद को अनुशासनहीन या आलसी मानकर कोसने लगते हैं। लेकिन रुकिए, हकीकत आपके मन के आलस से कहीं ज्यादा गहरी है। सीके बिरला अस्पताल की आंतरिक चिकित्सक डॉ. मनीषा अरोरा के अनुसार, इसके पीछे आपके शरीर का पूरा (

Winter Morning Laziness Science
Winter Morning Laziness Science

Body Science) काम करता है। यह महज आपकी पसंद-नापसंद नहीं, बल्कि आपके शरीर के भीतर होने वाले वे बदलाव हैं जो उठने की हर कोशिश को कुंद कर देते हैं।


सर्केडियन रिदम और सूरज की लुका-छिपी का खेल

डॉ. मनीषा अरोरा बताती हैं कि सर्दियों में जल्दी न उठ पाने का सबसे बड़ा वैज्ञानिक कारण हमारी ‘सर्केडियन रिदम’ में होने वाला बदलाव है। यह हमारे शरीर की एक अंदरूनी घड़ी होती है जो रोशनी के आधार पर सोने और जागने का चक्र तय करती है। सर्दियों में सूरज की रोशनी कम होती है और दिन छोटे हो जाते हैं। जब सुबह (Circadian Rhythm Regulation) को पर्याप्त धूप नहीं मिलती, तो दिमाग को सिग्नल मिलता है कि अभी रात ही है। इसी भ्रम के कारण शरीर सक्रिय होने के बजाय नींद की अवस्था में ही बना रहता है, जिससे उठना बोझिल महसूस होता है।


मेलाटोनिन का बढ़ा हुआ स्तर और नींद का गहरा असर

नींद लाने के लिए जिम्मेदार हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ का गहरा संबंध अंधेरे से है। सर्दियों में रातें लंबी और अंधेरी होती हैं, जिसकी वजह से शरीर में (Melatonin Hormone Balance) काफी देर तक ऊंचा बना रहता है। यह हार्मोन हमें शांत और नींद की मुद्रा में रखता है। जब हम सुबह उठने की कोशिश करते हैं, तब भी खून में इस हार्मोन की मौजूदगी बनी रहती है, जिससे शरीर में भारीपन और जबरदस्त सुस्ती महसूस होती है। यही वजह है कि सर्दियों में जागने के घंटों बाद भी हम पूरी तरह से फ्रेश महसूस नहीं कर पाते।


थर्मोरेगुलेशन: ठंड में ऊर्जा बचाने की शारीरिक कला

सर्दियों का ठंडा तापमान हमारे शरीर की कार्यप्रणाली को थोड़ा धीमा कर देता है। विज्ञान की भाषा में इसे ‘थर्मोरेगुलेशन’ कहते हैं, जहां शरीर बाहरी ठंड से लड़ने के लिए (Body Temperature Maintenance) पर अपनी सारी ऊर्जा केंद्रित कर देता है। गरम रजाई के अंदर का तापमान और कमरे की बाहर की ठंड के बीच एक बड़ा अंतर होता है। इस तापमान के अंतर के कारण शरीर आराम की स्थिति से बाहर निकलने का विरोध करता है। ठंड की वजह से रक्त संचार भी थोड़ा सुस्त हो सकता है, जो आलस की भावना को और बढ़ा देता है।


सेरोटोनिन की कमी और मानसिक सेहत पर साया

धूप की कमी सिर्फ नींद ही नहीं, बल्कि आपके मूड को भी प्रभावित करती है। सूरज की रोशनी कम मिलने से मस्तिष्क में ‘सेरोटोनिन’ नाम का ‘फील गुड’ केमिकल कम हो जाता है। (Serotonin and Mood Regulation) में आई यह गिरावट आपको उदास, चिड़चिड़ा और थका हुआ महसूस करा सकती है। कुछ लोगों में यह स्थिति ‘सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर’ (SAD) का रूप ले लेती है। जब मन प्रसन्न नहीं होता, तो शरीर भी ऊर्जावान महसूस नहीं करता और बिस्तर में दुबके रहने की इच्छा और बलवती हो जाती है।


विटामिन-D की कमी और दिनभर की थकान का चक्र

सर्दियों में धूप से दूरी का एक और बड़ा नुकसान है शरीर में विटामिन-D के स्तर का गिरना। विटामिन-D की कमी सीधे तौर पर (Vitamin D Deficiency Symptoms) जैसे हड्डियों में दर्द, थकान और मांसपेशियों की कमजोरी से जुड़ी है। जब शरीर में ऊर्जा का भंडार ही खाली हो, तो सुबह की फुर्ती की उम्मीद करना बेमानी है। विटामिन-D की यह कमी नींद की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती है, जिससे व्यक्ति रात भर सोने के बावजूद सुबह खुद को थका हुआ ही पाता है।


लाइफस्टाइल और डिहाइड्रेशन का छिपा हुआ हाथ

हमारी सर्दियों की आदतें भी इस आलस में घी डालने का काम करती हैं। ठंड में एक्सरसाइज की कमी और भारी कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन हमारे पाचन तंत्र को सुस्त बना देता है। इसके अलावा, सर्दियों में प्यास कम लगने के कारण (Body Dehydration Issues) पैदा हो जाते हैं। कम पानी पीने से शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं, जो थकान का कारण बनते हैं। डॉक्टर की सलाह है कि अगर आप सही पोषण, पर्याप्त पानी, थोड़ी धूप और नियमित हल्के व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें, तो इस ‘विंटर लेजीनेस’ को आसानी से मात दी जा सकती ह

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