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AgriculturePolicy – लोकसभा में MSP पर तीखी बहस, चौहान का कांग्रेस पर निशाना

AgriculturePolicy – लोकसभा में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर बुधवार को जोरदार बहस देखने को मिली, जहां केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट नहीं रहा है और अतीत में उसके फैसले मौजूदा दावों से मेल नहीं खाते। सदन में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से जुड़े अनुदानों पर चर्चा के दौरान यह मुद्दा प्रमुख रूप से सामने आया।

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एमएसपी पर पुराने फैसलों का हवाला
चौहान ने अपने जवाब में कहा कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के बावजूद पूर्ववर्ती सरकार ने लागत से 50 प्रतिशत अधिक एमएसपी देने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने इस दिशा में कदम उठाते हुए किसानों को बेहतर समर्थन देने का प्रयास किया है। मंत्री ने सवाल उठाया कि जो दल अब एमएसपी को लेकर सरकार को घेर रहे हैं, वे अपने कार्यकाल में इस मुद्दे पर क्या रुख रखते थे।

सदन में तीखे राजनीतिक बयान
बहस के दौरान चौहान ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि उसके कथन और आचरण में अंतर रहा है। उन्होंने कहा कि संसद में कुछ सदस्य एमएसपी को लेकर जोरदार तरीके से बात कर रहे हैं, लेकिन उनके पुराने फैसले कुछ और ही संकेत देते हैं। यह टिप्पणी सदन में चल रही राजनीतिक तनातनी के बीच आई, जहां दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।

कृषि क्षेत्र में उपलब्धियों का जिक्र
केंद्रीय मंत्री ने अपने वक्तव्य में सरकार की कृषि नीतियों और उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में खाद्यान्न और बागवानी उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। चावल उत्पादन के मामले में भारत ने वैश्विक स्तर पर अग्रणी स्थान हासिल किया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का ध्यान केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी है।

किसानों के उल्लेख पर आंकड़ों की चर्चा
चौहान ने अपने भाषण में ऐतिहासिक संदर्भ भी दिया और कहा कि पहले के वर्षों में किसानों के मुद्दों को उतनी प्राथमिकता नहीं दी गई, जितनी अब दी जा रही है। उन्होंने यह दावा किया कि वर्तमान नेतृत्व ने अपने सार्वजनिक संबोधनों में किसानों का उल्लेख अधिक बार किया है। बाद में उन्होंने अपने बयान से जुड़े आंकड़े सोशल मीडिया पर भी साझा किए, जिसमें विभिन्न वर्षों का विवरण दिया गया।

सोशल मीडिया पर बयान की चर्चा
संसद में दिए गए भाषण के बाद चौहान ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर संबंधित आंकड़े साझा किए। इसमें उन्होंने अलग-अलग वर्षों में किए गए उल्लेख का विवरण देते हुए अपनी बात को स्पष्ट करने की कोशिश की। इस पोस्ट के बाद राजनीतिक हलकों में इस विषय पर चर्चा और तेज हो गई।

बहस के बीच नीति पर फोकस कायम
लोकसभा में हुई इस चर्चा के दौरान राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ नीति संबंधी मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित रहा। एमएसपी, कृषि उत्पादन और किसानों की आय जैसे विषयों पर विभिन्न पक्षों ने अपनी राय रखी। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और बहस होने की संभावना है, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश के करोड़ों किसानों से जुड़ा हुआ है।

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