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AssamPolitics – समन के बाद तेज हुआ सियासी विवाद, केंद्र मे हैं कुंकी चौधरी

AssamPolitics – असम में चुनावी माहौल के बीच गुवाहाटी सेंट्रल सीट से असम जातीय परिषद की उम्मीदवार कुंकी चौधरी को पुलिस द्वारा भेजे गए समन ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। 27 वर्षीय चौधरी, जिन्हें राज्य की युवा उम्मीदवारों में प्रमुख माना जा रहा है, हाल के दिनों में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के साथ तीखे आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चर्चा में रही हैं। अब पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं ने इस पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया है।

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समन मिलने के बाद थाने पहुंचीं उम्मीदवार

पुलिस नोटिस मिलने के बाद कुंकी चौधरी तय समय पर पानबाजार थाने पहुंचीं, जहां उनसे करीब दो घंटे तक पूछताछ की गई। उन्हें पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि निर्धारित समय पर उपस्थित न होने की स्थिति में गिरफ्तारी की कार्रवाई हो सकती है। पूछताछ के बाद बाहर आकर उन्होंने बताया कि उन्होंने जांच अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष विस्तार से रखा है और सहयोग किया है। इस दौरान उनके समर्थक भी थाने के बाहर मौजूद रहे।

आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज

यह पूरा मामला एक शिकायत से जुड़ा है, जो भाजपा कार्यकर्ता नबा कुमार लखकर ने मतदान के दिन दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुंकी चौधरी और उनके चुनाव अभियान से जुड़े एक अन्य व्यक्ति ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। पुलिस ने इसी आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।

पार्टी ने लगाया राजनीतिक दबाव का आरोप

असम जातीय परिषद ने इस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी का कहना है कि यह कदम राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। पार्टी से जुड़े वकील शांतनु बोरठाकुर ने कहा कि दर्ज आरोप गंभीर नहीं हैं और जमानती प्रकृति के हैं, ऐसे में इस तरह का सख्त समन भेजना अनावश्यक है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह कार्रवाई केवल उम्मीदवार को परेशान करने के लिए की जा रही है।

डीपफेक वीडियो को लेकर उठे सवाल

इस पूरे मामले में एक और पहलू तब जुड़ा जब पार्टी ने आरोप लगाया कि कुंकी चौधरी के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से छेड़छाड़ किए गए वीडियो प्रसारित किए गए। इस संबंध में चौधरी पहले ही शिकायत दर्ज करा चुकी हैं। पार्टी नेताओं ने पूछा कि उस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उनका कहना है कि पुलिस की प्राथमिकता और निष्पक्षता पर इससे सवाल खड़े होते हैं।

मुख्यमंत्री के साथ बयानबाजी से बढ़ा विवाद

कुंकी चौधरी पहले भी विवादों में तब आई थीं जब मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उनके परिवार को लेकर सार्वजनिक बयान दिए थे। इन बयानों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया था और चौधरी ने उन्हें निराधार बताते हुए खारिज कर दिया था। इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है, जिसने चुनावी बहस को और तीखा बना दिया है।

निर्वाचन प्रक्रिया और प्रशासन की भूमिका पर बहस

असम जातीय परिषद के अध्यक्ष लुरिंज्योति गोगोई ने इस घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए कहा कि किसी उम्मीदवार को इस तरह तलब करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर डाल सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन और पुलिस का इस्तेमाल राजनीतिक प्रभाव में किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की जानकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दे दी गई है और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की गई है।

चुनावी माहौल में बढ़ती बयानबाजी

गुवाहाटी सेंट्रल सीट पर मुकाबला पहले से ही दिलचस्प माना जा रहा था, जहां कुंकी चौधरी भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार गुप्ता के खिलाफ मैदान में हैं। मौजूदा घटनाओं ने इस मुकाबले को और चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती हैं।

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