Cabinet Reshuffle – जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद मंत्रिमंडल बदलाव की तेज हुई चर्चा
Cabinet Reshuffle – केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इस घटनाक्रम के बाद केंद्र सरकार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो चुका था और भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें दोबारा उच्च सदन के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया था। ऐसे में उनका मंत्री पद छोड़ना पहले से ही लगभग तय माना जा रहा था।

राष्ट्रपति से प्रधानमंत्री की मुलाकात पर बढ़ी अटकलें
मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। आधिकारिक तौर पर इस भेंट को प्रधानमंत्री की हालिया विदेश यात्राओं के बाद की शिष्टाचार मुलाकात बताया गया। हालांकि, राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इस दौरान केंद्र सरकार में संभावित बदलावों को लेकर भी चर्चा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
मानसून सत्र से पहले बदलाव की संभावना
भाजपा से जुड़े सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिपरिषद में कुछ नए चेहरों को शामिल करने की तैयारी चल रही है। माना जा रहा है कि संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले मंत्रिमंडल में बदलाव देखने को मिल सकता है। पार्टी संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय को ध्यान में रखते हुए कुछ पदों पर नई नियुक्तियां की जा सकती हैं।
अन्य मंत्रियों की स्थिति भी चर्चा में
जॉर्ज कुरियन के अलावा केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है। पार्टी ने उन्हें भी दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा है, जिससे उनके मंत्री पद को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः उत्तर प्रदेश और दिल्ली भाजपा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भाजपा के ‘एक व्यक्ति, एक पद’ सिद्धांत के कारण उनके मंत्री पदों को लेकर भी निर्णय लिया जा सकता है।
प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर फोकस
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संभावित फेरबदल केवल संवैधानिक या संगठनात्मक कारणों तक सीमित नहीं है। कुछ मंत्रालयों के कामकाज और सरकार की प्राथमिकताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से भी बदलाव किए जा सकते हैं। सरकार ऐसे विभागों में नई जिम्मेदारियां सौंपकर कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकती है।
सहयोगी दलों को मिल सकता है अधिक प्रतिनिधित्व
हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर सहयोगी दलों की भूमिका भी मजबूत हुई है। विशेष रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की संसदीय ताकत बढ़ने के बाद उसे केंद्र सरकार में अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे गठबंधन के भीतर राजनीतिक संतुलन साधने में मदद मिल सकती है।
पश्चिम बंगाल पर भी रह सकती है नजर
हालिया चुनावी प्रदर्शन के बाद पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण राज्य बनकर उभरा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि राज्य को केंद्र सरकार में अधिक प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। इससे पार्टी अपने संगठनात्मक और राजनीतिक संदेश को और मजबूत करने का प्रयास कर सकती है।
कुरियन को नई जिम्मेदारी मिलने की चर्चा
जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि उन्हें भविष्य में किसी राज्य के राज्यपाल पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। आने वाले महीनों में कुछ राज्यों के राज्यपालों का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है, जिसके चलते नई नियुक्तियों की संभावनाएं भी बनी हुई हैं।
संगठन से सरकार तक का सफर
केरल में भाजपा संगठन के लिए लंबे समय तक काम करने वाले जॉर्ज कुरियन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधे केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया था। पार्टी के भीतर उन्हें एक समर्पित और जमीनी कार्यकर्ता के रूप में देखा जाता रहा है। उनके राजनीतिक सफर को भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में लंबे योगदान के उदाहरण के रूप में भी माना जाता है।
वरिष्ठ नेताओं को मिल सकती हैं नई भूमिकाएं
सूत्रों के अनुसार, कुछ वरिष्ठ नेताओं को विदेशों में राजनयिक जिम्मेदारियां भी सौंपी जा सकती हैं। हाल ही में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है। इसके बाद ऐसी संभावनाओं पर भी चर्चा बढ़ी है कि अनुभवी नेताओं को अन्य महत्वपूर्ण कूटनीतिक पदों पर नियुक्त किया जा सकता है।