Crime Verdict – पेंशन के लालच में पिता की हत्या, भाई-बहन को हुई फांसी
Crime Verdict – हैदराबाद की एक स्थानीय अदालत ने एक चर्चित हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सगे भाई और बहन को मृत्युदंड की सजा दी है। अदालत ने माना कि दोनों ने अपने परिवार की एक अन्य सदस्य के साथ मिलकर अपने ही पिता की हत्या की साजिश रची थी। मामले में मृतक की बहू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। यह मामला कई वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन था और अब अदालत ने सभी साक्ष्यों के आधार पर अपना निर्णय सुनाया है।

पेंशन और संपत्ति के लिए रची गई साजिश
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 70 वर्षीय बुजुर्ग रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। आरोप है कि परिवार के तीन सदस्यों ने उनकी पेंशन और मकान पर अधिकार हासिल करने के उद्देश्य से हत्या की योजना बनाई। जांच में सामने आया कि बुजुर्ग को खाने में कथित रूप से जहर दिया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। इसके बाद शव को छिपाने के लिए उसे कई हिस्सों में काटकर घर के भीतर अलग-अलग बाल्टियों में रखा गया।
दुर्गंध से खुला हत्या का राज
घटना का खुलासा अगस्त 2019 में तब हुआ, जब घर से लगातार आ रही दुर्गंध ने आसपास के लोगों को संदेह में डाल दिया। स्थानीय निवासियों ने स्थिति की जानकारी लेने के लिए घर में प्रवेश किया, जहां उन्हें मानव अवशेष दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और जांच शुरू हुई। पुलिस ने कुछ ही दिनों के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
अदालत ने सुनाई कड़ी सजा
मल्काजगिरि स्थित प्रधान जिला न्यायाधीश की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत गवाहों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया। अदालत ने मृतक के 47 वर्षीय बेटे और 36 वर्षीय बेटी को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। वहीं, 65 वर्षीय बहू को आजीवन कारावास की सजा दी गई। न्यायालय ने इस अपराध को अत्यंत गंभीर और दुर्लभ श्रेणी का मामला माना।
लखनऊ में लापता नाबालिग लड़कियों पर हाई कोर्ट की चिंता
दूसरी ओर, इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी में नाबालिग लड़कियों के लगातार लापता होने की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस को अधिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे बच्चों की सुरक्षा और स्वतंत्रता से जुड़ा विषय है।
पुलिस अधिकारियों से मांगी गई रिपोर्ट
न्यायालय ने पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) को तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही संबंधित थाना प्रभारियों, सर्किल अधिकारियों और जांच अधिकारियों को अगली सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित रहने के आदेश भी दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 जून को निर्धारित की गई है।
पुलिस आयुक्त से भी मांगा गया स्पष्टीकरण
जस्टिस वीण कुमार गिरि की पीठ ने लखनऊ पुलिस आयुक्त से भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सामने आए ऐसे मामलों को लेकर जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नाबालिगों के गायब होने के मामलों में त्वरित कार्रवाई, नियमित निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना कानून-व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है।