Delhi Panipat RRTS Corridor: अब पलक झपकते कटेगा पानीपत का सफर, सड़कों का जाम और वक्त की बर्बादी अब बीते कल की बात
Delhi Panipat RRTS Corridor: दिल्ली से पानीपत तक का सफर जल्द ही अपनी पुरानी पहचान बदलने वाला है। अब घंटों का थकाऊ सफर महज कुछ मिनटों की सुखद यात्रा में सिमट जाएगा। नमो भारत ट्रेन के नेटवर्क को विस्तार देते हुए दिल्ली-पानीपत-करनाल (Regional Rapid Transit System) कॉरिडोर पर काम अब जमीनी स्तर पर तेजी से हकीकत बनने की दिशा में बढ़ चुका है। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने उत्तरी दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण हिस्से में निर्माण की नींव रखने की तैयारी पूरी कर ली है।

कश्मीरी गेट पर यूटिलिटी शिफ्टिंग का बड़ा मिशन
NCRTC ने कश्मीरी गेट से भालस्वा तक के रूट पर प्रारंभिक कार्यों के लिए टेंडर आमंत्रित कर दिए हैं। इस चरण में बिजली की लो-टेंशन लाइनों, केबलों और स्ट्रीट लाइट्स को स्थानांतरित करने का (Infrastructure Utility Relocation) कार्य प्राथमिकता पर किया जाएगा। यह हिस्सा दिल्ली सेक्शन का सबसे जटिल भाग माना जा रहा है क्योंकि यहां घनी आबादी और भारी ट्रैफिक का दबाव हमेशा बना रहता है। अधिकारियों का मानना है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले इन सुविधाओं को व्यवस्थित करना अनिवार्य है।
ट्रैफिक मैनेजमेंट और जनता की सुविधा का तालमेल
परियोजना के दौरान स्थानीय नागरिकों (Delhi Panipat RRTS Corridor) और यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, (Public Service Management) को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि निर्माण के दौरान बिजली और यातायात जैसी सेवाएं बिना किसी बड़े व्यवधान के जारी रहें। ठेकेदार को स्थानीय अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के साथ निरंतर समन्वय में रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस यूटिलिटी शिफ्टिंग के कार्य को एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
136 किलोमीटर लंबे हाई-स्पीड कॉरिडोर की रूपरेखा
यह महत्वाकांक्षी 136 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खान से शुरू होकर हरियाणा के औद्योगिक और ऐतिहासिक शहरों को जोड़ेगा। यह मार्ग उत्तर-पश्चिम दिल्ली, नरेला, कुंडली, सोनीपत और गन्नौर जैसे (Urban Connectivity Hubs) से होकर गुजरेगा। इस पूरे रूट पर कुल 17 स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं। लगभग 33,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना दिल्ली और हरियाणा के बीच आर्थिक और सामाजिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाएगी।
180 की रफ्तार और समय की भारी बचत
इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत नमो भारत ट्रेनों की बेमिसाल गति होगी। ये ट्रेनें 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैक पर दौड़ेंगी, जिससे दिल्ली-पानीपत का सफर एक घंटे से भी कम समय में पूरा होगा। वर्तमान में (Travel Time Reduction) की यह सुविधा उन लाखों लोगों के लिए वरदान साबित होगी जो सड़क मार्ग से NH-44 के भीषण जाम में फंसते हैं। अब यात्री आरामदायक वातावरण में बैठकर बिना किसी तनाव के अपने गंतव्य तक समय पर पहुंच सकेंगे।
सराय काले खान बनेगा देश का अनूठा ट्रांजिट केंद्र
सराय काले खान स्टेशन भविष्य में भारत के सबसे बड़े ट्रांसपोर्ट हब के रूप में उभरेगा। यहाँ दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत जैसे तीनों प्राथमिक कॉरिडोर का (Interoperable Transit Center) विकसित किया जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि ट्रेनें एक कॉरिडोर से दूसरे कॉरिडोर पर बिना किसी रुकावट के चल सकेंगी। यात्री बिना प्लेटफार्म बदले अलग-अलग रूट की ट्रेनों का लाभ ले सकेंगे, जिससे अंतर्राज्यीय कनेक्टिविटी में एक नया अध्याय जुड़ेगा।
दिल्ली-मेरठ मॉडल की सफलता का विस्तार
दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का 55 किमी का हिस्सा वर्तमान में 11 स्टेशनों के साथ सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। वहाँ (Namo Bharat Train Operations) को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया ने दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। मेरठ मॉडल की सफलता और तकनीकी दक्षता को अब हरियाणा के औद्योगिक शहरों तक ले जाया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा नवंबर में दी गई अंतिम मंजूरी ने इस प्रोजेक्ट को आवश्यक प्रशासनिक गति प्रदान कर दी है।
नरेला से मुरथल तक निर्माण कार्य में तेजी
परियोजना के पहले चरण के अंतर्गत नरेला से मुरथल तक के 22 किमी के हिस्से पर काम अक्टूबर महीने से ही आरंभ हो चुका है। अब कश्मीरी गेट और भालस्वा जैसे (Delhi Section Construction) के क्षेत्रों में टेंडर जारी होने से पूरी परियोजना एक साथ गति पकड़ रही है। यह न केवल हरियाणा के औद्योगिक विकास को रफ्तार देगा, बल्कि दिल्ली के भीतर बढ़ते वाहन प्रदूषण और आबादी के दबाव को कम करने में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा। आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर एनसीआर की लाइफलाइन बन जाएगा।