Election2026 – बंगाल के दूसरे चरण में 142 सीटों पर मतदान, मतुआ वोट अहम
Election2026 – पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 29 अप्रैल को राजधानी कोलकाता समेत आसपास के क्षेत्रों की 142 सीटों पर मतदान होना है। इस चरण को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यहां कई प्रभावशाली नेता चुनाव मैदान में हैं और राजनीतिक समीकरण काफी जटिल बने हुए हैं। पिछली बार इन सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा था, लेकिन इस बार मुकाबला पहले से अधिक कड़ा नजर आ रहा है। राजनीतिक दलों के बीच प्रचार अभियान भी इसी हिसाब से तेज किया गया है।

मतुआ समुदाय की भूमिका बनी केंद्र में
इस चरण में करीब 40 सीटें ऐसी हैं जहां मतुआ समुदाय निर्णायक स्थिति में माना जाता है। उत्तर 24 परगना और नदिया जिलों में बड़ी संख्या में रहने वाला यह समुदाय पिछले कुछ चुनावों से चुनावी नतीजों को प्रभावित करता रहा है। पहले यह वर्ग पूरी तरह तृणमूल कांग्रेस के साथ था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसका झुकाव भारतीय जनता पार्टी की ओर भी देखा गया है। फिलहाल समुदाय के भीतर भी मतभेद हैं और अलग-अलग गुट अलग राजनीतिक दलों का समर्थन कर रहे हैं, जिससे परिणामों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
मुख्य चुनावी मुद्दों में स्थानीय और सामाजिक सवाल
चुनाव प्रचार के दौरान बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए हैं। इसके अलावा मतदाता सूची से नाम हटने का मामला भी चर्चा में है, जिससे कई लोगों में असंतोष देखा जा रहा है। इन मुद्दों का असर मतदाताओं के रुझान पर पड़ सकता है। खासकर महिला मतदाताओं की भागीदारी इस बार भी निर्णायक मानी जा रही है, क्योंकि पहले चरण में उनका मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा था।
मतदाता सूची से नाम कटने पर बढ़ी चिंता
मतुआ समुदाय के कई लोगों का कहना है कि आवश्यक दस्तावेजों की कमी के चलते उनके नाम मतदाता सूची से हट गए हैं। इससे उनके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ी है। कुछ परिवारों में स्थिति ऐसी है कि घर के कुछ सदस्यों का नाम सूची में है, जबकि बाकी के नाम नहीं हैं। इस वजह से लोगों में असमंजस और असुरक्षा की भावना देखने को मिल रही है। नागरिकता से जुड़े वादों और उनकी धीमी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप तेज
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने जहां मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि लोगों को भ्रमित किया जा रहा है और नागरिकता के नाम पर गलत संदेश फैलाया जा रहा है। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि उनकी सरकार बनती है तो नागरिकता से जुड़े मामलों का समाधान किया जाएगा।
चुनावी गणित और पिछले नतीजों का असर
पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने इन 142 सीटों में से बड़ी संख्या में जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा को सीमित सफलता मिली थी। हालांकि इस बार भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन का दावा किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुकाबला काफी हद तक मतुआ समुदाय और महिला मतदाताओं के रुझान पर निर्भर करेगा। इसके अलावा स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की छवि भी परिणामों को प्रभावित कर सकती है।
मतदान से वंचित मतदाताओं का मुद्दा
इस बार चुनाव में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं जो सूची से नाम हटने के कारण मतदान नहीं कर पा रहे हैं। इस स्थिति को लेकर कानूनी स्तर पर भी प्रयास किए गए, लेकिन अब तक सीमित मामलों में ही राहत मिल सकी है। इससे चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं की भागीदारी को लेकर सवाल उठे हैं।