राष्ट्रीय

ElectionCommission – मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कोलकाता दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन

ElectionCommission – मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तीन दिन के आधिकारिक दौरे पर पश्चिम बंगाल पहुंचे हैं, जहां आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा की जानी है। कोलकाता पहुंचने के बाद जब वे हवाई अड्डे से होटल की ओर सड़क मार्ग से जा रहे थे, उसी दौरान न्यू टाउन इलाके में कुछ लोगों ने काले झंडे दिखाकर विरोध जताया और नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण कुछ देर के लिए वहां माहौल तनावपूर्ण रहा, हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के चलते स्थिति नियंत्रण में रही।

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न्यू टाउन में हुआ विरोध प्रदर्शन

न्यू टाउन क्षेत्र में आयोजित इस प्रदर्शन का नेतृत्व सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के विधायक तापस चटर्जी ने किया। उन्होंने दावा किया कि इस विरोध कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए थे और यह मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर जनता की चिंता को व्यक्त करता है।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर राज्य में सवाल उठ रहे हैं। इसी को लेकर उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के दौरे के दौरान अपनी नाराजगी दर्ज कराई।

सुरक्षा व्यवस्था के बीच नियंत्रित रहा हालात

जब विरोध प्रदर्शन हो रहा था, उस समय बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी मौके पर मौजूद थे। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदर्शनकारियों को उस मार्ग से दूर रखा, जिससे होकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त का काफिला गुजर रहा था।

सुरक्षा बलों ने घेरा बनाकर स्थिति को संभाला और यह सुनिश्चित किया कि उनके काफिले की आवाजाही में कोई बाधा न आए। अधिकारियों के अनुसार पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य बनी रही।

चुनाव तैयारियों की समीक्षा के लिए दौरा

ज्ञानेश कुमार का यह दौरा राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान वे निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा करेंगे।

बैठकों में मतदान केंद्रों की तैयारियां, मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर चर्चा होने की संभावना है। आयोग आमतौर पर चुनाव से पहले ऐसे दौरों के माध्यम से तैयारियों का आकलन करता है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तीखी प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल के दिनों में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान कुछ नामों को लेकर विवाद सामने आए हैं।

मध्य कोलकाता में आयोजित एक धरना कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि अगर इसी मतदाता सूची के आधार पर 2024 के आम चुनाव संपन्न हुए थे, तो इसमें शामिल लोगों को अपने मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है।

केंद्र सरकार और संवैधानिक पदों पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी टिप्पणी की और कहा कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता जरूरी है। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची की विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

इसके अलावा उन्होंने कुछ संवैधानिक पदों से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर भी सवाल उठाए। ममता बनर्जी ने पूछा कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस के इस्तीफे की परिस्थितियों की जांच होनी चाहिए, क्योंकि उनके कार्यकाल का अभी काफी समय बाकी था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व राज्यपाल और वर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के पिछले वर्ष दिए गए इस्तीफे को लेकर भी चर्चा हुई थी।

राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल

मुख्य निर्वाचन आयुक्त के दौरे और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शन के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच चुनावी तैयारियों तथा मतदाता सूची को लेकर बहस जारी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आएंगे, राज्य में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। फिलहाल निर्वाचन आयोग की बैठकें और प्रशासनिक तैयारियां आने वाले चुनावी कार्यक्रम के लिए अहम मानी जा रही हैं।

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