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ElectionShift – बंगाल में सत्ता बदलते ही ममता खेमे में बढ़ी हलचल

ElectionShift – पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी नतीजों के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस की हार के साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कई वरिष्ठ अधिकारी, सलाहकार और विशेषज्ञ अपने पदों से हटने लगे हैं। पिछले कई वर्षों से राज्य सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों में अहम भूमिका निभाने वाले चेहरों के इस्तीफों ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है।

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ममता के भरोसेमंद अधिकारियों ने छोड़ी जिम्मेदारी

राज्य सचिवालय से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहकार रहे पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय और एच.के. द्विवेदी ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। दोनों अधिकारी प्रशासनिक मामलों में लंबे समय तक ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाते रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस्तीफे मिलने के बाद आवश्यक औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

अलापन बंद्योपाध्याय का नाम पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा था। वर्ष 2021 में केंद्र और राज्य सरकार के बीच हुए प्रशासनिक विवाद के दौरान ममता बनर्जी ने खुलकर उनका समर्थन किया था। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें मुख्यमंत्री का मुख्य सलाहकार बनाया गया था और सरकार के कई अहम फैसलों में उनकी भूमिका देखी जाती थी।

आर्थिक नीतियों से जुड़े प्रमुख चेहरे ने भी दिया इस्तीफा

पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष और जाने-माने अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार ने भी पद छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि चुनावी हार के बाद इस जिम्मेदारी पर बने रहना उचित नहीं होगा। राजनीतिक हलकों में उनके इस कदम को नैतिक आधार पर लिया गया निर्णय माना जा रहा है।

राज्य की औद्योगिक और आर्थिक योजनाओं में अभिरूप सरकार की अहम भूमिका रही थी। उनके इस्तीफे के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि नई सरकार औद्योगिक नीति और निवेश मॉडल में बदलाव कर सकती है।

कानूनी मोर्चे पर भी सरकार को झटका

राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने भी अपना पद छोड़ दिया है। वे पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार की ओर से कई बड़े मामलों में अदालत में पक्ष रखते रहे थे। शिक्षक भर्ती विवाद, राजनीतिक हिंसा और अन्य संवेदनशील मामलों में उन्होंने सरकार का प्रतिनिधित्व किया था।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद कानूनी और प्रशासनिक ढांचे में बड़े स्तर पर बदलाव होना तय माना जा रहा है। ऐसे में वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों के इस्तीफे को उसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

मीडिया और सलाहकार समूह में भी बदलाव

सूत्रों के मुताबिक, सरकार से जुड़े कुछ मीडिया सलाहकारों और विभिन्न बोर्डों-अकादमियों में नियुक्त वरिष्ठ व्यक्तियों ने भी अपने पदों से दूरी बनानी शुरू कर दी है। ये वे लोग थे जो लंबे समय से सरकार की नीतियों और सार्वजनिक छवि को संभालने में सक्रिय भूमिका निभाते रहे थे।

कोलकाता के प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कई अधिकारी अब नई राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश कर रहे हैं। नई सरकार के गठन से पहले ही प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ गई है।

चुनावी हार के बाद भी ममता का रुख सख्त

इन घटनाक्रमों के बीच ममता banerjee ने अभी तक सार्वजनिक रूप से राजनीतिक सक्रियता कम नहीं की है। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने चुनाव परिणामों को लेकर सवाल उठाए हैं और कुछ क्षेत्रों में मतदान प्रक्रिया पर आपत्ति भी जताई है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर उनकी ओर से विस्तृत बयान अभी सामने नहीं आया है।

294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। चुनाव परिणामों के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर क्या बदलाव करती है और तृणमूल कांग्रेस आगे अपनी राजनीतिक रणनीति किस दिशा में ले जाती है।

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