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FuelPrices – बंगाल चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल महंगाई पर सरकार ने दी सफाई

FuelPrices – केंद्र सरकार ने उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और देश में ईंधन की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और घबराहट में खरीदारी से बचने की अपील भी की है।

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आपूर्ति को लेकर सरकार का भरोसा

पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मंगलवार को जानकारी देते हुए कहा कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर्याप्त है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार हर स्तर पर आपूर्ति बनाए रखने के लिए काम कर रही है। उनके अनुसार, न केवल पेट्रोल और डीजल बल्कि एलपीजी गैस की सप्लाई भी सुचारू रूप से जारी है, जिससे आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

घबराहट में खरीदारी से बचने की अपील

सरकार ने यह भी साफ किया कि हाल के दिनों में फैल रही अफवाहों के कारण लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन और गैस सिलेंडर खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, जो स्थिति को अनावश्यक रूप से प्रभावित कर सकता है। सुजाता शर्मा ने लोगों से संयम बरतने और केवल जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करने की अपील की। उन्होंने बताया कि कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति भी करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जिससे व्यावसायिक गतिविधियों पर असर नहीं पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और संभावित युद्ध जैसे हालात को लेकर भी सरकार से सवाल किए गए। इस पर मंत्रालय ने कहा कि पिछले करीब दो महीनों से चल रहे इन हालात के बावजूद भारत में ईंधन आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है। सरकार लगातार वैश्विक परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।

तेल कंपनियों को हो रहा नुकसान

हाल ही में केंद्र सरकार ने यह जानकारी दी थी कि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कंपनियों को पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 20 रुपये और डीजल पर करीब 100 रुपये तक का घाटा हो रहा है। इसके बावजूद सरकार ने फिलहाल उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर नहीं पड़ने देने का संकेत दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर भारत की चिंता

दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की ओर से कहा गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जल्द सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बहाल होना जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रभारी राजदूत योजना पटेल ने इस मुद्दे को उठाते हुए वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस मार्ग की अहमियत पर जोर दिया।

ऊर्जा सुरक्षा पर संतुलित रणनीति

वर्तमान हालात में सरकार की कोशिश है कि देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता और कीमतों के बीच संतुलन बनाए रखा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में सरकार की नीतियां और समय पर लिए गए फैसले ही आने वाले दिनों में स्थिति को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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