GigWorkers – ईंधन महंगा होने पर ऐप वर्कर्स ने शुरू किया विरोध
GigWorkers – पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर देशभर में ऐप आधारित काम करने वाले कर्मचारियों की नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट सेवाओं से जुड़े गिग वर्कर्स ने अब अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। गिग और प्लेटफॉर्म सेवा श्रमिक संघ ने सरकार और बड़ी डिजिटल कंपनियों से भुगतान व्यवस्था में बदलाव की मांग की है।

संगठन का कहना है कि लगातार बढ़ते ईंधन खर्च के बीच मौजूदा कमाई से काम चलाना मुश्किल होता जा रहा है। इसी वजह से कई शहरों में काम करने वाले कर्मचारी आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं।
न्यूनतम भुगतान तय करने की मांग
यूनियन ने मांग रखी है कि फूड डिलीवरी, कैब सेवा और अन्य ऐप आधारित काम करने वाले कर्मचारियों को कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान दिया जाए। संगठन का कहना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद मौजूदा भुगतान मॉडल अब व्यावहारिक नहीं रह गया है।
यूनियन नेताओं के मुताबिक, कई वर्कर्स रोज लंबे समय तक सड़कों पर काम करते हैं। ऐसे में पेट्रोल और डीजल महंगा होने से उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि खर्च बढ़ने के बावजूद कंपनियों की ओर से भुगतान दरों में पर्याप्त सुधार नहीं किया गया है।
देशभर में सेवाएं बंद रखने की अपील
गिग और प्लेटफॉर्म सेवा श्रमिक संघ ने विरोध दर्ज कराने के लिए देशभर के ऐप वर्कर्स से कुछ घंटों तक सेवाएं बंद रखने की अपील की है। संगठन ने दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट सेवाओं को अस्थायी रूप से रोकने का आह्वान किया है।
यूनियन का दावा है that बड़ी संख्या में कर्मचारी इस अभियान का समर्थन कर सकते हैं। संगठन के अनुसार देशभर में करोड़ों लोग इस क्षेत्र से जुड़े हैं और ईंधन कीमतों में बदलाव का असर सीधे उनकी कमाई पर पड़ता है।
ईंधन कीमतों में हालिया बढ़ोतरी बनी वजह
संघ के मुताबिक हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई वृद्धि ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। यूनियन नेताओं का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव के कारण ईंधन महंगा हुआ है, लेकिन इसका असर सबसे ज्यादा छोटे स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
संगठन का यह भी कहना है कि पहले से बढ़ चुकी घरेलू गैस और अन्य जरूरत की चीजों की कीमतों ने कामगारों के मासिक खर्च को और बढ़ा दिया है। ऐसे में ऐप आधारित कर्मचारियों के लिए बचत करना मुश्किल होता जा रहा है।
कंपनियों और सरकार से समाधान की उम्मीद
यूनियन ने सरकार के साथ-साथ बड़ी प्लेटफॉर्म कंपनियों से भी हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते भुगतान संरचना में बदलाव नहीं किया गया तो कई कर्मचारी इस क्षेत्र से बाहर जाने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
गिग वर्कर्स का मानना है कि तेज गर्मी, बारिश और लंबे काम के घंटों के बीच दोपहिया वाहन चलाकर सेवाएं देना आसान नहीं होता। इसलिए कंपनियों को ईंधन खर्च और काम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नई नीति बनानी चाहिए।
फिलहाल इस मुद्दे पर कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विरोध प्रदर्शन की घोषणा के बाद इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है।