MiddleEast – ट्रंप ने ईरान पर बड़ा दावा किया, दिए फिर बातचीत के संकेत
MiddleEast – अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कूटनीतिक समाधान की बात कही है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि अमेरिका ईरान पर एक बड़े सैन्य हमले की तैयारी कर चुका था, जिसे बाद में रोक दिया गया। ट्रंप के इस बयान ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। वहीं, ईरान की ओर से भी अमेरिकी बयानों पर सतर्क प्रतिक्रिया सामने आई है।

ट्रंप ने बड़े सैन्य अभियान का किया दावा
एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक व्यापक सैन्य कार्रवाई पर गंभीरता से विचार किया था। उनके अनुसार, यदि यह अभियान शुरू होता तो इसका असर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे बड़े सैन्य हमलों में गिना जाता और ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता था। हालांकि, उन्होंने कहा कि अंततः इस योजना को लागू नहीं किया गया।
बातचीत शुरू होने की जताई उम्मीद
ट्रंप ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच सोमवार से वार्ता शुरू होने की संभावना है। हालांकि उन्होंने बातचीत के स्थान या उसके स्वरूप के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की। उनके मुताबिक, सैन्य विकल्प की बजाय बातचीत के जरिए समाधान तलाशना बेहतर रहेगा, क्योंकि इससे संघर्ष टल सकता है और लोगों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी भी पक्ष के लिए लाभदायक नहीं होता।
क्षेत्रीय सहयोगियों का भी किया जिक्र
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में सऊदी अरब सहित पश्चिम एशिया के कुछ सहयोगी देशों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के कई साझेदार देशों ने कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया है। ट्रंप के अनुसार, इन देशों की प्राथमिकता क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और लंबे समय से चले आ रहे तनाव को बातचीत के माध्यम से कम करना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी दिया बयान
इससे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक संभावित समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने की दिशा में प्रगति हुई है। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि समझौता आगे बढ़ता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द खोला जा सकता है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया था कि फिलहाल ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले का आदेश नहीं दिया जाएगा।
ईरान ने जताया अविश्वास
दूसरी ओर, ईरान के रक्षा मंत्री ने अमेरिका के बयानों पर भरोसा न करने की बात दोहराई है। उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी घोषणाओं से न तो चौंका है और न ही अपनी सुरक्षा तैयारियों में कोई ढील दे रहा है। उनके अनुसार, मौजूदा हालात में देश पूरी तरह सतर्क है और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच आधिकारिक स्तर पर प्रस्तावित वार्ता को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।