GirirajSingh – सुरक्षा हालात और जेएनयू विवाद पर तीखा बयान
GirirajSingh – केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सोमवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में देश की सुरक्षा स्थिति और विश्वविद्यालय परिसर में हालिया घटनाओं पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पहले देश के अलग-अलग हिस्सों में विस्फोट और हिंसा की घटनाएं आम थीं, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उनके मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता और सख्त नीतियों के कारण उग्र गतिविधियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में अब पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग खत्म हो चुकी हैं और कानून व्यवस्था मजबूत हुई है। मंत्री ने कहा कि जो भी देश के खिलाफ काम करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई तय है।
सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार का रुख
गिरिराज सिंह ने कहा कि वर्तमान सरकार ने सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पहले जहां आतंकी घटनाओं की खबरें अक्सर आती थीं, वहीं अब हालात में सुधार देखा जा रहा है। उनके अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों को खुली छूट दी गई है ताकि वे कानून के दायरे में रहकर सख्त कार्रवाई कर सकें।
मंत्री ने यह भी कहा कि देश में अशांति फैलाने की कोशिश करने वाले तत्वों की पहचान कर उन्हें पकड़ा जा रहा है। उनका मानना है कि सख्ती और स्पष्ट नीति के कारण ही सुरक्षा परिदृश्य में बदलाव आया है।
जेएनयू में झड़प को लेकर टिप्पणी
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हाल में हुई झड़प पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसर में वैचारिक मतभेद रखने वाले छात्रों को निशाना बनाया जाता है। उनका कहना था कि वामपंथी विचारधारा से असहमत छात्रों पर हमला होना चिंताजनक है।
उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच कर सख्त कदम उठाए, ताकि पढ़ाई का माहौल प्रभावित न हो। मंत्री ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में असहमति का समाधान संवाद से होना चाहिए, हिंसा से नहीं।
परिसर में क्या हुआ था
जानकारी के अनुसार, रविवार देर रात जेएनयू परिसर में विरोध मार्च के दौरान दो छात्र संगठनों के बीच टकराव हो गया। इस दौरान कई छात्र घायल हुए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि परिसर में किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि दोषियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
रात करीब डेढ़ बजे कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान स्थिति अधिक तनावपूर्ण हो गई थी। छात्र संघ ने कुलपति के इस्तीफे और एक निष्कासन आदेश वापस लेने की मांग को लेकर मार्च निकाला था।
आरोप-प्रत्यारोप और प्रशासन की भूमिका
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने संवाद के बजाय विरोधी समूहों को आमने-सामने आने दिया। वहीं, दूसरे छात्र संगठन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हिंसा की शुरुआत विरोध मार्च के दौरान हुई।
कुलपति के एक हालिया बयान को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ है। कुछ छात्र संगठनों ने उस टिप्पणी को आपत्तिजनक बताया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि बयान को संदर्भ से हटाकर देखा जा रहा है।
फिलहाल परिसर में स्थिति सामान्य करने की कोशिशें जारी हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन और सुरक्षा कर्मी हालात पर नजर रखे हुए हैं। मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि टकराव की असल वजह क्या थी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और छात्र राजनीति के बीच यह मुद्दा चर्चा में बना हुआ है। सरकार और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने नजरिए से घटनाक्रम को देख रहे हैं, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन शांति बहाल करने पर जोर दे रहा है।



