Judiciary – सेवानिवृत्त न्यायाधीश जीएस पटेल के परिवार को लगातार मिल रहीं धमकियां
Judiciary – बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जीएस पटेल और उनके परिवार को पिछले कई महीनों से कथित तौर पर धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। यह मामला उस फैसले के बाद सामने आया, जो उन्होंने दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़े एक महत्वपूर्ण उत्तराधिकार विवाद में सुनाया था। हाल ही में उनकी बेटी के साथ लंदन में हुई एक घटना ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

लंदन में बेटी को मिला धमकी भरा पत्र
जानकारी के अनुसार, न्यायमूर्ति पटेल की बेटी अदिति पटेल को 5 जून को लंदन में एक गुमनाम पत्र प्राप्त हुआ। पत्र में उनके और परिवार के खिलाफ गंभीर धमकी दी गई थी। इसके साथ एक इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज डिवाइस भी भेजी गई, जिसमें कथित तौर पर चेतावनी से जुड़ी सामग्री मौजूद थी। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों का ध्यान मामले की ओर गया है।
पहले भी हो चुकी हैं संदिग्ध घटनाएं
परिवार के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब उन्हें निशाना बनाया गया हो। इससे पहले भी अदिति पटेल के लंदन स्थित आवास में कथित रूप से सेंधमारी की घटना हुई थी। इस वर्ष अप्रैल में उन पर एक हमले की भी सूचना सामने आई थी, जिसमें उन्हें शारीरिक चोट पहुंची थी। इन घटनाओं को लेकर परिवार ने लगातार चिंता जताई है।
मुंबई स्थित घर पर भी पहुंचा पत्र
बताया गया है कि मुंबई में न्यायमूर्ति पटेल के निवास पर उनकी पत्नी को भी एक पत्र मिला। पत्र में खुद को दाऊदी बोहरा समुदाय के कुछ प्रभावशाली सदस्यों का समूह बताने वाले लोगों ने कथित तौर पर विभिन्न घटनाओं की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। पत्र की सामग्री में परिवार को लेकर चेतावनी जैसी बातें लिखी गई थीं, जिसकी जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।
उत्तराधिकार विवाद के फैसले के बाद बढ़ा मामला
न्यायमूर्ति जीएस पटेल ने वर्ष 2024 में दाऊदी बोहरा समुदाय के उत्तराधिकार से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाया था। बताया जा रहा है कि इसी निर्णय के बाद सितंबर 2024 से परिवार को धमकी भरे संदेश और पत्र मिलने शुरू हुए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा और जांच एजेंसियां घटनाओं की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही हैं।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर उठे सवाल
पूर्व न्यायाधीश ने इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी जानकारी उपलब्ध करा दी है और उन्हें आवश्यक सहयोग भी मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीशों से अपेक्षा की जाती है कि वे किसी दबाव, भय या पक्षपात से मुक्त होकर निर्णय लें। ऐसे में यदि किसी न्यायिक फैसले के बाद न्यायाधीशों या उनके परिवारों को धमकियों का सामना करना पड़े, तो यह न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
सुरक्षा व्यवस्था और जांच पर नजर
मामले के सामने आने के बाद भारत और विदेश में संबंधित एजेंसियों की भूमिका पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है। चूंकि कुछ घटनाएं ब्रिटेन में हुई हैं, इसलिए विभिन्न अधिकार क्षेत्रों के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां सभी पहलुओं की समीक्षा कर रही हैं।