LeadershipRace – बंगाल में नए मुख्यमंत्री को लेकर भाजपा में तेज चर्चा
LeadershipRace – पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी अब मुख्यमंत्री के चयन को लेकर महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है। राज्य में पहली बार सरकार बनाने जा रही भाजपा के भीतर कई नामों पर विचार किया जा रहा है। इसी बीच वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना ने राजनीतिक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोलकाता पहुंचने की संभावना है। माना जा रहा है कि भाजपा विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व लगातार विभिन्न नेताओं की स्वीकार्यता और राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कई चेहरे
भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री पद के लिए कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। राजनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि पार्टी राज्य में महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर विचार कर सकती है। इस संदर्भ में अग्निमित्रा पॉल और रूपा गांगुली के नामों की चर्चा तेज हुई है।
इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को भी संगठनात्मक अनुभव के कारण संभावित दावेदार माना जा रहा है। हालांकि पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच जिस नाम को सबसे अधिक समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है, वह शुभेंदु अधिकारी हैं।
चुनावी जीत में शुभेंदु की भूमिका पर जोर
भाजपा की इस बड़ी जीत में शुभेंदु अधिकारी की भूमिका को काफी अहम माना जा रहा है। वर्ष 2021 में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हराने के बाद उन्होंने 2026 के चुनाव में भी मजबूत राजनीतिक प्रदर्शन किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने खुद को राज्य में भाजपा के सबसे आक्रामक और सक्रिय नेताओं में स्थापित किया है।
तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने राज्यभर में संगठन को मजबूत करने का काम किया। उन्हें बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों और क्षेत्रीय समीकरणों की अच्छी समझ रखने वाला नेता माना जाता है। यही वजह है कि पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए उपयुक्त विकल्प मान रहा है।
पार्टी के सामने संतुलन की चुनौती
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा नेतृत्व के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की है। यदि पार्टी किसी अन्य चेहरे को आगे करती है तो कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया भी अहम विषय बन सकती है। शुभेंदु अधिकारी लंबे समय से राज्य में विपक्ष की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं और उन्होंने कई बड़े आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
उनके प्रशासनिक अनुभव को भी भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके शुभेंदु को राज्य के प्रशासनिक ढांचे और नौकरशाही की कार्यप्रणाली की अच्छी जानकारी है। ऐसे में नई सरकार के गठन के दौरान यह अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
अंतिम फैसले पर टिकी राजनीतिक नजरें
भाजपा के पिछले राजनीतिक फैसलों को देखते हुए यह भी माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व अंतिम समय में किसी नए चेहरे को सामने ला सकता है। हालांकि फिलहाल पार्टी के भीतर सबसे अधिक चर्चा शुभेंदु अधिकारी के नाम को लेकर ही बनी हुई है।
राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री का चयन केवल लोकप्रियता के आधार पर नहीं बल्कि संगठन, प्रशासनिक अनुभव और भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखकर किया जाएगा। अब सभी की निगाहें विधायक दल की बैठक और केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर टिकी हुई हैं।