Lionel Messi Kolkata Visit: मेसी के दीवानों का टूटा दिल, कोलकाता में मची वो खौफनाक अफरा-तफरी जिसका सच सुनकर सन्न रह जाएंगे आप…
Lionel Messi Kolkata Visit: फुटबॉल जगत के महानायक लियोनेल मेसी की कोलकाता यात्रा को लेकर जिस उत्साह की उम्मीद थी, वह शनिवार को गहरी निराशा और अव्यवस्था के सैलाब में डूब गई। सॉल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित इस (Global Sports Event) के दौरान सुरक्षा के इंतजाम ताश के पत्तों की तरह ढह गए। विश्व कप विजेता कप्तान का स्वागत करने पहुंचे हजारों प्रशंसकों को उस समय धक्का लगा जब स्टेडियम के भीतर वीआईपी कल्चर और राजनेताओं की भारी मौजूदगी ने आम जनता के लिए मेसी को देखना नामुमकिन बना दिया। यह ऐतिहासिक पल बंगाल के खेल इतिहास के लिए एक काले अध्याय में तब्दील हो गया।

अभिषेक बनर्जी ने किया बंगाल सरकार का बचाव
इस पूरे घटनाक्रम पर मचे राजनीतिक घमासान के बीच तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने इस अव्यवस्था के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना करने वालों को करारा जवाब देते हुए (Political Accountability) का मुद्दा उठाया। अभिषेक ने दलील दी कि जहां भाजपा शासित राज्यों में बड़ी घटनाओं पर मौन साध लिया जाता है, वहीं बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए घटना के महज एक घंटे के भीतर ही सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी।
प्रयागराज महाकुंभ की त्रासदी से की गई तुलना
अभिषेक बनर्जी ने विपक्ष पर हमलावर होते हुए अन्य राज्यों की दुर्घटनाओं का उदाहरण दिया। उन्होंने प्रयागराज के महाकुंभ और दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ का जिक्र करते हुए (Crisis Management) पर सवाल खड़े किए। अभिषेक ने पूछा कि क्या उन राज्यों में हुई मौतों पर वहां के मुख्यमंत्रियों ने जिम्मेदारी ली थी? उनका कहना था कि तृणमूल कांग्रेस जनता के प्रति जवाबदेह है और इसीलिए वे गलतियों को स्वीकार करने का साहस रखते हैं, जो उन्हें अन्य राजनीतिक दलों से अलग बनाता है।
सत्ता की अकड़ और जनता के सामने झुका सिर
अपनी बात को और मजबूती देने के लिए सांसद ने एक शेर का सहारा लिया और कहा कि ‘झुकता वही है जिसमें जान है, अकड़ तो मुर्दों की पहचान है।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि (Democratic Values) को ध्यान में रखते हुए उनकी सरकार ने जनता के सामने सिर झुकाया है। अभिषेक ने दावा किया कि भाजपा की हार और तृणमूल की जीत का सबसे बड़ा कारण यही है कि वे अपनी जनता की भावनाओं का सम्मान करते हैं और गलतियां होने पर दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटते।
मेसी की एक झलक को तरसते रह गए प्रशंसक
मेसी की यह यात्रा उनके बहुचर्चित ‘गोट टूर 2025’ का पहला पड़ाव थी, लेकिन यह पूरी तरह कुप्रबंधन की भेंट चढ़ गई। जिन प्रशंसकों ने मोटी रकम खर्च कर टिकट खरीदे थे, उन्हें (Audience Experience) के नाम पर केवल धक्के और अपमान मिला। गुस्साए दर्शकों का आरोप है कि मैदान का मुख्य हिस्सा राजनेताओं और उनके करीबियों से भरा हुआ था। इसी नाराजगी के चलते मैच के बाद प्रशंसकों ने स्टेडियम में तोड़फोड़ की और आयोजकों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बंगाल की छवि धूमिल हुई।
खेल मंत्री अरूप बिस्वास का नैतिक आधार पर इस्तीफा
अव्यवस्था के इस बड़े संकट की गाज आखिरकार प्रदेश के खेल मंत्री अरूप बिस्वास पर गिरी है। मंगलवार को उन्होंने अपनी (Ministerial Resignation) मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सौंप दी, जिसे तुरंत स्वीकार कर लिया गया। मंत्री के इस कदम को सरकार की छवि सुधारने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। खेल प्रेमियों का मानना है कि इतने बड़े आयोजन के लिए जो सुरक्षा और समन्वय की आवश्यकता थी, उसे सुनिश्चित करने में खेल मंत्रालय पूरी तरह विफल रहा, जिसकी कीमत अंततः एक बड़े इस्तीफे के रूप में चुकानी पड़ी।
हाई-प्रोफाइल एसआईटी करेगी अव्यवस्था की जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए ममता सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस टीम में पीयूष पांडेय, जावेद शमीम, सुप्रतीम सरकार और मुरलीधर जैसे अनुभवी (IPS Officers) को शामिल किया गया है। यह उच्च स्तरीय जांच टीम इस बात का पता लगाएगी कि सुरक्षा घेरा कैसे टूटा और वीआईपी एंट्री के नाम पर नियमों की धज्जियां किसने उड़ाईं। एसआईटी को निर्देश दिए गए हैं कि वे निजी आयोजकों की भूमिका की भी जांच करें जिन्होंने इस कार्यक्रम के कमर्शियल राइट्स लिए थे।
डीजीपी राजीव कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी
प्रशासनिक मोर्चे पर सख्ती दिखाते हुए राज्य सरकार ने डीजीपी राजीव कुमार को भी आड़े हाथों लिया है। उन्हें एक आधिकारिक नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करने का आदेश दिया गया है कि (Law and Order) की ऐसी विफलता क्यों हुई। नोटिस में विशेष रूप से पूछा गया है कि पुलिस प्रशासन और निजी सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी क्यों थी। सरकार यह जानना चाहती है कि आखिर किसकी अनुमति से स्टेडियम के संवेदनशील क्षेत्रों में अनधिकृत लोगों की भीड़ जमा होने दी गई।
भविष्य में पुनरावृत्ति न होने का सख्त संकल्प
पश्चिम बंगाल सरकार ने जनता को आश्वस्त किया है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य अब खेल आयोजनों के लिए (Standard Operating Procedures) को फिर से परिभाषित करना है। अभिषेक बनर्जी के बयानों और सरकार की हालिया कार्रवाइयों से यह साफ है कि वे इस डैमेज कंट्रोल के जरिए आगामी चुनावों से पहले जनता का भरोसा वापस जीतना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि एसआईटी की रिपोर्ट में किन बड़े चेहरों के नाम सामने आते हैं और मेसी के प्रशंसकों को असली इंसाफ कब मिलता है।



