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MorchellaFarming – कश्मीर में दुर्लभ मशरूम की खेती से किसानों को मिली नई दिशा

MorchellaFarming – कश्मीर के कृषि वैज्ञानिकों ने एक ऐसा शोध परिणाम सामने रखा है, जो आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने के नए रास्ते खोल सकता है। लंबे समय से केवल जंगलों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाला एक दुर्लभ और महंगा मशरूम अब नियंत्रित वातावरण में उगाने में सफलता मिली है। इस उपलब्धि के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि किसान भी इस उच्च मूल्य वाली फसल की खेती कर सकेंगे और पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार कर पाएंगे।

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जंगलों तक सीमित था यह खास मशरूम

मोरल्स या मोरचेला नाम से जाना जाने वाला यह मशरूम आमतौर पर पहाड़ी इलाकों के घने जंगलों में ही पाया जाता है। स्थानीय स्तर पर इसे कंगाच भी कहा जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह केवल सीमित मौसम और विशेष परिस्थितियों में ही उगता है, जिसके कारण इसकी उपलब्धता बेहद कम रहती है। बाजार में इसकी कीमत 15 हजार से लेकर 40 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। इसे ढूंढना भी आसान नहीं होता, क्योंकि लोगों को कठिन मौसम और दुर्गम इलाकों में जाकर इसकी तलाश करनी पड़ती है।

वैज्ञानिकों की मेहनत से मिली सफलता

श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है। विशेषज्ञों की टीम ने कई वर्षों तक अलग-अलग क्षेत्रों से इस मशरूम के नमूने एकत्र किए और उनके प्राकृतिक परिवेश का गहराई से अध्ययन किया। मिट्टी की बनावट, तापमान, नमी और आसपास की वनस्पतियों जैसे कारकों को समझने के बाद उन्होंने कृत्रिम रूप से वही परिस्थितियां तैयार कीं। इस प्रक्रिया में कई प्रयोग किए गए, जिनमें से कुछ में उल्लेखनीय सफलता मिली है।

किसानों और युवाओं के लिए नए अवसर

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह उपलब्धि खेती के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। अब तक इस मशरूम के लिए जंगलों पर निर्भरता बनी हुई थी, लेकिन नई तकनीक से नियंत्रित और बड़े स्तर पर उत्पादन संभव हो सकेगा। इससे न केवल किसानों को लाभ मिलेगा, बल्कि युवाओं और नए उद्यमियों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही, जंगलों पर दबाव कम होने से पर्यावरण संरक्षण में भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

पॉलीहाउस से खुले खेत तक विस्तार

शोध के दौरान कुछ विशेषज्ञों ने इस मशरूम को पॉलीहाउस जैसी नियंत्रित संरचनाओं में उगाने में सफलता पाई, जबकि अन्य ने इसे खुले वातावरण में भी विकसित करने के तरीके खोजे। इससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य में अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में भी इसकी खेती संभव हो सकती है। घाटी के कई इलाकों में इसका परीक्षण किया जा चुका है और आगे इसे विभिन्न ऊंचाई और जलवायु वाले क्षेत्रों में भी आजमाने की योजना बनाई जा रही है।

कठिन प्रक्रिया लेकिन संभावनाएं व्यापक

मोरचेला की खेती को हमेशा चुनौतीपूर्ण माना गया है, क्योंकि इसके लिए बेहद सटीक तापमान, नमी और मिट्टी की आवश्यकता होती है। हर किस्म को अलग-अलग पर्यावरणीय परिस्थितियों की जरूरत होती है, जिसे समझना और दोहराना आसान नहीं होता। वैज्ञानिकों ने इन सभी पहलुओं का विस्तार से अध्ययन कर प्रत्येक किस्म के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार किया, जिससे इस दिशा में सफलता मिल पाई है।

आर्थिक दृष्टि से बड़ा बदलाव संभव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस मशरूम की मांग लगातार बनी रहती है, जिससे यह एक उच्च मूल्य वाली फसल के रूप में देखा जाता है। नियंत्रित खेती की तकनीक विकसित होने के बाद जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए यह आय का एक नया और आकर्षक विकल्प बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे बड़े स्तर पर अपनाया गया, तो यह क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था और जैव-आधारित उद्योगों को नई गति दे सकता है।

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