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Mumbai BMC Mayor Election: बांद्रा के आलीशान होटल में पार्षदों ने की घेराबंदी, अब बीएमसी पर होगा कब्जा…

Mumbai BMC Mayor Election: मुंबई की राजनीति में बांद्रा का ताज लैंड्स एंड होटल रविवार की रात अचानक सत्ता संघर्ष का केंद्र बन गया। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार से ही वहां रुके हुए अपनी शिवसेना के 29 पार्षदों से मुलाकात की, जिसके बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। शिंदे का यह (Political Strategy) वाला कदम ऐसे समय में आया है जब निगम चुनावों के नतीजों के बाद मेयर पद के लिए खींचतान जारी है। गठबंधन को बहुमत मिलने के बावजूद पार्षदों को होटल में शिफ्ट करना विपक्ष को हमला करने का नया मौका दे रहा है।

Mumbai BMC Mayor Election
Mumbai BMC Mayor Election

मेयर की कुर्सी पर शिंदे का अटूट दावा

मीडिया से बातचीत के दौरान शिंदे ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि इस बार मुंबई में केवल महायुति का ही मेयर बनेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल मुंबई ही नहीं, बल्कि पड़ोसी शहर कल्याण-डोंबिवली में भी (Coalition Government) का परचम लहराएगा और वहां भी महायुति का ही महापौर सत्ता संभालेगा। उनके इस बार-बार दोहराए जा रहे दावे से यह संकेत मिलता है कि सत्ता के गलियारों में मेयर की कुर्सी को लेकर रणनीति पूरी तरह तैयार की जा चुकी है और वे किसी भी हाल में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

विपक्ष का तीखा प्रहार और हॉर्स ट्रेडिंग का डर

विपक्षी दल शिवसेना (यूबीटी) ने पार्षदों की इस होटल शिफ्टिंग पर तीखे सवाल खड़े किए हैं और इसे शिंदे की असुरक्षा बताया है। उद्धव गुट का दावा है कि शिंदे इन पार्षदों को ढाल बनाकर भाजपा से (Power Sharing Agreement) के लिए बेहतर सौदेबाजी करने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष का यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री को डर सता रहा है कि उनके पार्षदों को तोड़ा या खरीदा जा सकता है, इसलिए उन्हें एक ही छत के नीचे कड़ी सुरक्षा और निगरानी में रखा गया है।

ट्रेनिंग का बहाना या सुरक्षा का घेरा

शिवसेना ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक संगठनात्मक प्रक्रिया करार दिया है। पार्टी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कई पार्षद पहली बार चुनकर आए हैं, इसलिए उन्हें (Counseling and Training) के विशेष सत्र के लिए होटल में रखा गया है। शिंदे ने तंज कसते हुए कहा कि शिवसेना ऐसी पार्टी नहीं है जो किसी दबाव या डर के आगे झुक जाए, बल्कि शिवसेना (यूबीटी) को खुद अपने पार्षदों की चिंता करनी चाहिए कि कहीं वे खिसक न जाएं।

मेयर उम्मीदवार को क्रॉस वोटिंग की उम्मीद

महायुति के रणनीतिकार और मंत्री उदय सामंत ने विपक्ष पर एक बड़ा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की है। उन्होंने मीडिया को संकेत दिया कि प्रतिद्वंद्वी दलों के कुछ पार्षद महायुति के मेयर उम्मीदवार के पक्ष में (Cross Voting) कर सकते हैं। सामंत ने यहां तक आरोप लगाया कि उद्धव गुट के कई पार्षद मतदान प्रक्रिया से गायब रह सकते हैं। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि जब महापौर चुनाव का समय आएगा, तब पूरी दुनिया को पता चल जाएगा कि कौन किसके साथ खड़ा है।

बाला साहेब के शताब्दी वर्ष का भावनात्मक कार्ड

शिवसेना के भीतर मेयर पद की मांग के पीछे एक भावनात्मक और ऐतिहासिक कारण भी जुड़ा हुआ है। शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे का जन्म शताब्दी वर्ष 23 जनवरी से शुरू हो रहा है, जिसे देखते हुए शिंदे गुट चाहता है कि (Shiv Sena Legacy) को बरकरार रखने के लिए इस बार उनका अपना महापौर कुर्सी पर बैठे। पार्टी कार्यकर्ताओं और पार्षदों के बीच यह संदेश स्पष्ट है कि बाला साहेब के इस गौरवशाली वर्ष में मुंबई महानगरपालिका की कमान शिवसेना के पास होनी चाहिए, ताकि जनता के बीच एक मजबूत संदेश जाए।

पार्षदों को शिंदे की कड़ी चेतावनी और नसीहत

होटल में हुई इस गोपनीय बैठक के दौरान एकनाथ शिंदे ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को केवल राजनीति नहीं, बल्कि जनसेवा का पाठ भी पढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि चुनाव जीतना केवल शुरुआत है, असली परीक्षा (Public Service) के मैदान में होगी। उन्होंने पार्षदों को चेतावनी दी कि जनता ने उन्हें विकास के लिए चुना है, इसलिए वे तुरंत अपना एक्शन प्लान तैयार करें। शिंदे ने कड़े निर्देश दिए कि नागरिकों को वार्ड स्तर पर कोई भी असुविधा नहीं होनी चाहिए और पार्षदों की मौजूदगी धरातल पर दिखनी चाहिए।

मुंबई को सर्वश्रेष्ठ बनाने का एक्शन प्लान

उपमुख्यमंत्री ने पार्षदों से बातचीत में ‘मॉर्निंग रूटीन’ तय करते हुए कहा कि सुबह जल्दी उठो और काम पर लग जाओ ताकि लोगों की समस्याओं का तुरंत समाधान हो सके। उन्होंने एक बड़ा लक्ष्य देते हुए कहा कि तुम्हारे वार्ड (Urban Development) के मामले में मुंबई के सबसे बेहतरीन वार्ड होने चाहिए। शिंदे का जोर इस बात पर है कि पार्षद केवल चुनाव तक सीमित न रहें, बल्कि वे हर समय जनता के लिए उपलब्ध रहें और मुंबई के बुनियादी ढांचे को सुधारने में अपनी पूरी ताकत झोंक दें।

सत्ता संघर्ष का अंतिम पड़ाव और आगे की राह

जैसे-जैसे मेयर चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, बांद्रा के होटल की यह हलचल मुंबई की सत्ता के अंतिम परिणाम की ओर इशारा कर रही है। (Municipal Administration) में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए महायुति के दोनों घटक दल अपनी-अपनी गोटियां सेट करने में जुटे हैं। शिंदे का यह सक्रिय रुख और पार्षदों की किलाबंदी यह साबित करती है कि वे बीएमसी की सत्ता पर अपना पूर्ण नियंत्रण चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि विपक्षी गुट इस चक्रव्यूह को भेद पाता है या शिंदे का मेयर दांव सफल रहता है।

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