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NewsClickCase – दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यूजक्लिक से जुड़े मामले किए निरस्त

NewsClickCase – दिल्ली हाई कोर्ट ने समाचार पोर्टल न्यूजक्लिक और उसके संस्थापक-संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को बड़ी कानूनी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर इन मामलों को आगे बढ़ाना न्यायिक प्रक्रिया का उचित उपयोग नहीं माना जा सकता।

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यह मामला विदेशी निवेश से जुड़े कथित नियमों के उल्लंघन और उससे संबंधित जांचों से जुड़ा था। अदालत के फैसले के बाद दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा तथा प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज की गई कार्रवाई पर भी असर पड़ा है।

अदालत ने क्या कहा

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज प्राथमिकी को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का अनुचित इस्तेमाल माना जाएगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब मूल आपराधिक मामला ही टिकाऊ नहीं पाया गया, तो उससे जुड़ी अन्य कार्यवाहियों की वैधता भी प्रभावित होती है।

न्यायालय के अनुसार, किसी भी आपराधिक जांच को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार और स्पष्ट आरोप आवश्यक होते हैं। यदि ऐसा आधार स्थापित नहीं हो पाता, तो संबंधित कार्रवाई को जारी रखना उचित नहीं माना जा सकता।

क्या थे आरोप

मामला वर्ष 2020 में दर्ज एक प्राथमिकी से जुड़ा था। जांच एजेंसियों का आरोप था कि न्यूजक्लिक की मूल कंपनी को वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान विदेश से निवेश प्राप्त हुआ था और इस प्रक्रिया में विदेशी निवेश संबंधी नियमों का उल्लंघन किया गया।

शिकायत में यह भी कहा गया था कि निवेश की संरचना और कंपनी के शेयरों के मूल्यांकन को लेकर कुछ अनियमितताएं हुईं। आरोपों के अनुसार, निवेश की राशि का उपयोग विभिन्न मदों में किया गया था, जिसकी जांच आवश्यक मानी गई थी।

प्रवर्तन निदेशालय की जांच पर भी असर

दिल्ली पुलिस की प्राथमिकी के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने भी धन शोधन से संबंधित मामला दर्ज किया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब मूल आरोप ही न्यायिक परीक्षण में टिक नहीं पाए, तो उससे जुड़े धन शोधन के आरोपों की स्थिति भी स्वतः प्रभावित होती है।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जांच के दौरान लंबे समय तक पूछताछ और दस्तावेजों की समीक्षा की गई, लेकिन ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया जिससे गंभीर आपराधिक गतिविधि या धन शोधन के आरोप स्पष्ट रूप से सिद्ध होते हों।

निवेश प्रक्रिया पर अदालत की टिप्पणी

फैसले में न्यायालय ने माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर निवेश प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह अवैध या धोखाधड़ीपूर्ण नहीं कहा जा सकता। अदालत के अनुसार, जांच एजेंसियां ऐसे तथ्य प्रस्तुत नहीं कर सकीं जिनसे आपराधिक धोखाधड़ी या साजिश के आरोपों को पर्याप्त मजबूती मिलती।

न्यायालय ने यह भी कहा कि किसी कारोबारी या वित्तीय लेनदेन को आपराधिक गतिविधि साबित करने के लिए स्पष्ट और विश्वसनीय साक्ष्यों की आवश्यकता होती है। केवल आशंका या सामान्य आरोपों के आधार पर आपराधिक मामला कायम नहीं रखा जा सकता।

लंबे समय से चर्चा में था मामला

न्यूजक्लिक से जुड़ा यह प्रकरण पिछले कुछ वर्षों से कानूनी और सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ था। जांच एजेंसियों द्वारा कई दौर की पूछताछ और दस्तावेजी जांच की गई थी। इस दौरान मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बहस भी होती रही।

अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आया है। हालांकि भविष्य में संबंधित पक्षों द्वारा आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है या नहीं, इस पर नजर बनी रहेगी। फिलहाल अदालत के आदेश ने न्यूजक्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है।

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