Parliament – मानसून सत्र में नए विधेयकों के साथ तेज रहेंगे विपक्ष के तेवर
Parliament- संसद के मानसून सत्र में इस सप्ताह केंद्र सरकार कई अहम विधेयकों को लोकसभा के समक्ष रखने की तैयारी में है। सरकार का उद्देश्य इन प्रस्तावित कानूनों को आगे बढ़ाना होगा, जबकि विपक्ष विभिन्न राजनीतिक और सार्वजनिक मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

सरकार के एजेंडे में तीन प्रमुख विधेयक
संसदीय कार्यसूची के अनुसार, सरकार जिन प्रमुख विधेयकों को सदन में पेश करने जा रही है, उनमें सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाकर 37 किए जाने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा भारतीय सांख्यिकी संस्थान को अधिक व्यापक वैधानिक आधार देने संबंधी विधेयक तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विकास अधिनियम में संशोधन से जुड़ा प्रस्ताव भी सूचीबद्ध किया गया है। सरकार इन विधेयकों पर चर्चा के बाद उन्हें पारित कराने का प्रयास करेगी।
विपक्ष छात्रों और मंदिर से जुड़े मुद्दों पर आक्रामक
दूसरी ओर, कांग्रेस सहित विपक्षी दल छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। संसद के शुरुआती दिनों में विपक्ष ने इन विषयों पर लगातार विरोध दर्ज कराया था। हाल के दिनों में संसद परिसर में विपक्ष की ओर से सांकेतिक नाट्य प्रदर्शन भी किया गया, जिसके जरिए मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा प्रकरण को राजनीतिक मुद्दा बनाया गया।
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि राम मंदिर से जुड़ी अनियमितताओं का मामला केवल चढ़ावे तक सीमित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कथित गड़बड़ियों की शुरुआत मंदिर निर्माण की शुरुआती प्रक्रियाओं से ही हो गई थी। तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ लेने की मंशा से अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। उनके अनुसार, मंदिर ट्रस्ट के गठन और उससे जुड़े निर्णयों में भी केंद्र सरकार की भूमिका रही, इसलिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।
भाजपा और वीएचपी ने जताई आपत्ति
राम मंदिर से जुड़े सांकेतिक प्रदर्शन पर भाजपा और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन से करोड़ों रामभक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और प्रदर्शन में शामिल अन्य नेताओं से सार्वजनिक माफी की मांग की।
प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज
तरुण चुघ ने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर धार्मिक प्रतीकों का उपयोग उचित नहीं है। उनका आरोप है कि विपक्ष लगातार सनातन पर टिप्पणी कर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, विश्व हिंदू परिषद के नेता सुरेंद्र गुप्ता ने भी इस प्रदर्शन को अनुचित बताते हुए राजनीतिक दलों से धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान बनाए रखने की अपील की।
पप्पू यादव ने आरोपों को किया खारिज
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भाजपा और वीएचपी के आरोपों को अस्वीकार करते हुए कहा कि उनका विरोध किसी धर्म या आस्था के खिलाफ नहीं था। उनके अनुसार, प्रदर्शन का उद्देश्य कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाना था। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या प्राथमिकी से उन्हें कोई भय नहीं है और वे अपने रुख पर कायम हैं।