राष्ट्रीय

ParliamentControversy – बीजू पटनायक पर टिप्पणी से गरमाई सियासत, समिति से इस्तीफा

ParliamentControversy – बीजू जनता दल (बीजद) के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने रविवार को एक अहम कदम उठाते हुए संसदीय समिति से इस्तीफा दे दिया। यह निर्णय उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे द्वारा ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक को लेकर दिए गए विवादित बयान के विरोध में लिया। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

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विवादित बयान के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव
27 मार्च को दिए गए एक बयान में निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि 1960 के दशक में बीजू पटनायक, तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के बीच संपर्क सूत्र की भूमिका निभा रहे थे। इस बयान के सामने आते ही बीजद ने कड़ा विरोध जताया और इसे ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का प्रयास बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी न केवल एक वरिष्ठ नेता की छवि को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि ओडिशा के लोगों की भावनाओं को भी आहत करती है।

संसदीय समिति से इस्तीफे का फैसला
सस्मित पात्रा ने संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित संसद की स्थायी समिति से इस्तीफा देते हुए स्पष्ट किया कि वह ऐसे व्यक्ति के नेतृत्व में काम नहीं कर सकते, जिसने सार्वजनिक रूप से बीजू पटनायक के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की हो। उन्होंने 28 मार्च को राज्यसभा के सभापति को लिखे पत्र में कहा कि यह उनका सैद्धांतिक निर्णय है और वे इस मामले में समझौता नहीं कर सकते। उन्होंने अपने इस्तीफे को स्वीकार करने और उसे लोकसभा अध्यक्ष को भेजने का अनुरोध भी किया, क्योंकि संबंधित समिति लोकसभा के अंतर्गत आती है।

बीजद नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
बीजद के अन्य सांसदों और नेताओं ने भी इस मुद्दे पर खुलकर विरोध जताया। सांसद मानस मंगराज, सुभाशीष खुंटिया और मुजीबुल्ला खान ने निशिकांत दुबे के बयान को ‘ओडिशा के गौरव का अपमान’ बताया। वहीं, पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देबी प्रसाद मिश्रा ने इस बयान को ‘अशोभनीय और दुर्भावनापूर्ण’ करार देते हुए कहा कि यह एक देशभक्त नेता का अपमान है। उन्होंने साफ तौर पर दुबे से सार्वजनिक माफी की मांग की है।

बीजू पटनायक की विरासत और राजनीतिक महत्व
बीजू पटनायक ओडिशा की राजनीति के एक प्रमुख और सम्मानित चेहरे रहे हैं। उन्होंने दो बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन के बाद 1997 में उनके बेटे नवीन पटनायक ने बीजू जनता दल की स्थापना की, जो आज भी राज्य की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभा रही है। ऐसे में उनके योगदान पर सवाल उठाने को लेकर पार्टी और समर्थकों में असंतोष स्वाभाविक माना जा रहा है।

निशिकांत दुबे के दावों पर बहस जारी
निशिकांत दुबे ने अपने बयान में यह भी कहा था कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान अमेरिका और सीआईए की भूमिका रही थी और बीजू पटनायक इस पूरे घटनाक्रम में एक कड़ी के रूप में जुड़े थे। उन्होंने ओडिशा के चारबतिया हवाई अड्डे का भी जिक्र किया, जिसे उन्होंने अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से जोड़कर देखा। हालांकि, इन दावों को लेकर इतिहासकारों और राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं और इस पर व्यापक बहस जारी है।

माफी की मांग के बीच बढ़ता दबाव
बीजद ने स्पष्ट किया है कि जब तक निशिकांत दुबे अपने बयान पर माफी नहीं मांगते, तब तक यह विवाद थमने वाला नहीं है। पार्टी का मानना है कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को अपने शब्दों के प्रति सजग रहना चाहिए। वहीं, इस मुद्दे ने संसद और राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है।

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