PoliticalNews – संजय राउत का दावा, अमित शाह और बालासाहेब से जुड़ी पुरानी मुलाकात पर बयान
PoliticalNews – शिवसेना के राज्यसभा सांसद और पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता संजय राउत ने एक इंटरव्यू के दौरान ऐसा दावा किया है जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के बीच अतीत में हुई एक मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना उस समय की है जब अमित शाह गुजरात की राजनीति में सक्रिय थे और कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे थे। राउत के इस बयान के सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

इंटरव्यू के दौरान उठाया गया पुराना प्रसंग
कपिल सिब्बल के साथ बातचीत में संजय राउत ने कई समसामयिक मुद्दों पर अपनी बात रखी। इसी दौरान जब उनसे शिवसेना में हुई टूट के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस पुराने घटनाक्रम का उल्लेख किया। राउत ने कहा कि यह प्रसंग उनके निजी अनुभव से जुड़ा है और उस समय वे खुद वहां मौजूद थे। उन्होंने इसे वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़ते हुए अपनी नाराजगी भी व्यक्त की।
मातोश्री में मुलाकात का किया जिक्र
राउत के अनुसार, यह घटना उस समय की है जब वे बालासाहेब ठाकरे के साथ ‘मातोश्री’ में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि उस दिन बार-बार संदेश मिल रहा था कि गुजरात से एक विधायक, अमित शाह, बालासाहेब से मिलने की इच्छा जता रहे हैं। पहले उन्हें शाम का समय दिया गया, लेकिन बाद में अगली सुबह मिलने के लिए कहा गया। राउत ने कहा कि तय समय पर अमित शाह पहुंचे और उन्होंने बालासाहेब को प्रणाम कर अपनी स्थिति समझाई।
कानूनी मामलों में मदद की अपील का दावा
संजय राउत के मुताबिक, उस मुलाकात में अमित शाह ने खुद को एक प्रतिबद्ध हिंदुत्व विचारधारा से जुड़ा नेता बताया और कहा कि उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं। राउत ने दावा किया कि शाह ने यह भी कहा था कि उन्हें गुजरात से बाहर रहना पड़ रहा है और उनका केस मुंबई स्थानांतरित हो चुका है। इस दौरान उन्होंने बालासाहेब से न्यायिक स्तर पर मदद की अपेक्षा जताई।
बालासाहेब की भूमिका को लेकर बयान
राउत ने आगे कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने इस मामले में तत्कालीन नेता मनोहर जोशी को एक न्यायाधीश से संपर्क करने के लिए कहा। उनके अनुसार, जोशी ने जज से बात करवाई और बालासाहेब ने सहायता का अनुरोध किया। राउत ने यह भी दावा किया कि बातचीत के दौरान जज ने कुछ कानूनी जटिलताओं का जिक्र किया, जिस पर बालासाहेब ने अपनी राय रखी।
राजनीतिक संदर्भ में बयान का महत्व
राउत ने इस पूरे घटनाक्रम को वर्तमान राजनीतिक हालात से जोड़ते हुए कहा कि जिन लोगों की कभी मदद की गई, वही आज राजनीतिक मतभेदों के कारण अलग रास्ते पर हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही संबंधित पक्षों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। ऐसे में इस बयान को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।
प्रतिक्रियाओं का इंतजार
संजय राउत के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस तरह के दावों पर आमतौर पर तथ्यात्मक पुष्टि और आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जाता है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर अन्य नेताओं या संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आ सकती है, जिससे स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।