PotteryAward – उत्कृष्ट माटीकला शिल्पियों को मिलेगा सम्मान और पुरस्कार
PotteryAward – उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड ने पारंपरिक माटीकला और मृदा शिल्पकला को प्रोत्साहन देने के लिए नई पहल की घोषणा की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत जिले के ऐसे कारीगरों और शिल्पियों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने मिट्टी से जुड़े हस्तशिल्प और कलात्मक उत्पादों के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक कला को संरक्षित करने के साथ-साथ कारीगरों को प्रोत्साहित करना भी है।

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी विनय कुमार ने बताया कि पुरस्कार योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पात्र कारीगर निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन कर इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं।
पारंपरिक कारीगरों को मिलेगा मंच
योजना के अंतर्गत उन शिल्पकारों को शामिल किया जाएगा जो मिट्टी के बर्तन, सजावटी वस्तुएं, खिलौने, मूर्तियां और अन्य माटीकला उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका चलाते हैं। विभाग का मानना है कि ऐसे कारीगरों की कला और मेहनत को पहचान देने से पारंपरिक शिल्प को नई ऊर्जा मिलेगी।
अधिकारियों के अनुसार, माटीकला से जुड़े कई कारीगर वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उनके कौशल और रचनात्मकता को सम्मानित करने के लिए मंडल स्तर पर पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
चयनित प्रतिभागियों को मिलेगा नकद पुरस्कार
चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कारीगरों को तीन श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले शिल्पी को 15 हजार रुपये, द्वितीय स्थान पर रहने वाले को 12 हजार रुपये तथा तृतीय स्थान हासिल करने वाले को 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
इसके अलावा विजेताओं को सम्मान-पत्र, स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। विभाग का कहना है कि इससे कारीगरों को अपने कार्य को और बेहतर ढंग से आगे बढ़ाने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
पंजीकरण होना जरूरी
योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित कारीगर का विभाग में पंजीकृत होना अनिवार्य है। केवल वही अभ्यर्थी आवेदन के पात्र होंगे जो माटीकला या मृदा शिल्पकला के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं और निर्धारित मानदंडों को पूरा करते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि चयन समिति विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन करने के बाद योग्य प्रतिभागियों का चयन करेगी। चयन प्रक्रिया में उत्पादों की गुणवत्ता, कलात्मकता और पारंपरिक शिल्प के संरक्षण में योगदान जैसे बिंदुओं पर विचार किया जाएगा।
30 जून तक कर सकते हैं आवेदन
इच्छुक कारीगर और शिल्पी 30 जून तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करना अनिवार्य होगा। इनमें आधार कार्ड, जाति प्रमाण-पत्र, बैंक खाते की पासबुक, आवेदक का फोटो और उसके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की तस्वीरें शामिल हैं।
विभाग ने अभ्यर्थियों से आवेदन करते समय सभी जानकारियां सही और पूर्ण रूप से दर्ज करने की अपील की है, ताकि चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की समस्या न आए।
पूर्व विजेता नहीं होंगे पात्र
योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन कारीगरों को पहले माटीकला पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, वे इस बार आवेदन नहीं कर सकेंगे। यह प्रावधान नए और अन्य योग्य शिल्पियों को अवसर देने के उद्देश्य से रखा गया है।
अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से न केवल पारंपरिक माटीकला को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवा पीढ़ी भी इस कला से जुड़ने के लिए प्रेरित होगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।