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ReservationRow – महिला आरक्षण को लेकर सरकार पर कांग्रेस का सीधा हमला

ReservationRow – महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर सियासी बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया है कि वे इस विषय पर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं और केवल राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि महिलाओं को उनका अधिकार देने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए, न कि इसे भविष्य की शर्तों से जोड़ा जाए। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है।

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महिला आरक्षण और परिसीमन पर विवाद

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेस वार्ता में कहा कि हाल ही में लोकसभा में जो विधेयक पारित नहीं हो सका, उसे महिला आरक्षण विधेयक बताना गलत है। उनके अनुसार, वह वास्तव में परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव था, जिसे लेकर भ्रम पैदा किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक पहले ही संसद से पारित हो चुका है और अब वह संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

तत्काल लागू करने की मांग

कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। पार्टी का तर्क है कि इसे जनसंख्या या सीटों की संख्या बढ़ाने जैसी शर्तों से जोड़ना उचित नहीं है। श्रीनेत ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में इस मुद्दे को लेकर गंभीर है, तो उसे बिना किसी देरी के इसे लागू करना चाहिए।

सरकार पर लगाए राजनीतिक आरोप

प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय लेने से बच रही है। पार्टी का कहना है कि आरक्षण को लागू करने में देरी के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। श्रीनेत ने यह भी कहा कि महिलाओं को उनका प्रतिनिधित्व देने के बजाय इस विषय को जटिल बनाया जा रहा है, जिससे समाधान टलता जा रहा है।

महिलाओं के प्रतिनिधित्व के आंकड़े

कांग्रेस ने देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी से जुड़े आंकड़ों का भी हवाला दिया। पार्टी के अनुसार, वर्तमान लोकसभा में महिलाओं की संख्या कुल सांसदों का एक छोटा हिस्सा है। इसी तरह, राज्यों की विधानसभाओं में भी महिला प्रतिनिधित्व सीमित है। कांग्रेस का कहना है कि यह स्थिति बताती है कि महिला आरक्षण को लागू करने की जरूरत कितनी जरूरी है।

पुराने संदर्भ और राजनीतिक पृष्ठभूमि

कांग्रेस ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण का विचार नया नहीं है और इसे दशकों पहले उठाया गया था। पार्टी का दावा है कि समय-समय पर इस प्रस्ताव को अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों के कारण आगे नहीं बढ़ाया जा सका। वहीं, परिसीमन को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए और कहा कि प्रस्तावित बदलावों को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है।

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