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SupremeCourt – प्रत्यर्पण मामले में केंद्र को अंतिम चेतावनी, सख्त हुए CJI…

SupremeCourt – सुप्रीम कोर्ट ने बांग्लादेश प्रत्यर्पण से जुड़े एक संवेदनशील मामले में केंद्र सरकार को स्पष्ट रुख पेश करने के लिए आखिरी मौका दिया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि यदि सरकार निर्धारित समय में अपना पक्ष स्पष्ट नहीं करती, तो अदालत अंतिम सुनवाई के लिए आगे बढ़ेगी। इस टिप्पणी को अदालत के कड़े रुख के रूप में देखा जा रहा है।

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अदालत ने केंद्र से मांगा स्पष्ट जवाब

सुनवाई के दौरान पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली भी शामिल थे। अदालत ने केंद्र की ओर से उपस्थित वकील को निर्देश दिया कि वह संबंधित विभाग से स्पष्ट निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराएं। पीठ ने साफ किया कि यह मामला अब और लंबित नहीं रखा जा सकता और सरकार की ओर से ठोस जवाब जरूरी है।

याचिकाकर्ता की ओर से उठे सवाल

इस मामले में याचिकाकर्ता भोदू शेख की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े ने पैरवी की। उन्होंने अदालत में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अब तक अपना स्पष्ट पक्ष न रखना उचित नहीं है। वकीलों ने यह भी बताया कि शेख की गर्भवती बेटी को बांग्लादेश भेजा गया था, जो मानवीय दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है। इस पर अदालत ने भी स्थिति की संवेदनशीलता को स्वीकार किया।

CJI ने दिया अंतिम अवसर

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार को यह आखिरी मौका दिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ, तो अदालत इस मामले की अंतिम सुनवाई करेगी। साथ ही, उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि इस याचिका को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए, ताकि मामले का शीघ्र निपटारा हो सके।

मानवीय आधार पर पहले दी गई थी राहत

इस पूरे मामले में पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया था। पिछले वर्ष 3 दिसंबर को अदालत ने मानवीय आधार पर एक गर्भवती महिला और उसके आठ वर्षीय बच्चे को भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी। ये दोनों पहले बांग्लादेश भेजे जा चुके थे। अदालत ने इस दौरान पश्चिम बंगाल सरकार को बच्चे की देखभाल सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने बीरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को यह भी आदेश दिया था कि गर्भवती महिला, सुनाली खातून, को प्रसव सहित सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाएं। अदालत का यह फैसला मानवीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए लिया गया था, जिसे व्यापक सराहना भी मिली थी।

हाईकोर्ट ने केंद्र के फैसले को बताया था अवैध

इस मामले की पृष्ठभूमि में कलकत्ता हाईकोर्ट का एक महत्वपूर्ण आदेश भी शामिल है। 26 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट ने सुनाली खातून और अन्य लोगों को बांग्लादेश भेजने के केंद्र सरकार के फैसले को अवैध करार देते हुए उसे रद्द कर दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

निगरानी में रखने की बात भी आई सामने

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि संबंधित प्राधिकरण ने केवल मानवीय आधार पर महिला और बच्चे को भारत में प्रवेश की अनुमति दी है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों को निगरानी में रखा जाएगा, ताकि सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का ध्यान रखा जा सके।

जल्द हो सकता है अंतिम फैसला

मामले की गंभीरता और मानवीय पहलुओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट अब इसे लंबा खींचने के मूड में नहीं दिख रहा। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि केंद्र सरकार ने समय रहते जवाब नहीं दिया, तो अंतिम सुनवाई कर निर्णय लिया जाएगा। इस मामले पर आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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